Haryana Weather: उत्तर भारत में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार 27 और 28 जनवरी को उत्तर भारत के अनेक हिस्सों में मौसम खराब रह सकता है, जबकि 1 फरवरी से कुछ राज्यों में भारी बारिश और ओलावृष्टि के आसार हैं।
पिछले तीन दिनों से अच्छी धूप निकलने के बाद अब पश्चिम की ओर से आने वाली हवाओं के कारण आसमान में बादल छा गए हैं। पाकिस्तान और पंजाब की ओर से आए बादल अब हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे अगले 48 घंटे तक मौसम अस्थिर बना रहने की संभावना है।
मौसम विभाग का कहना है कि हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बूंदाबांदी से लेकर हल्की बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के साथ बौछारें भी देखने को मिल सकती हैं। 23 जनवरी के बाद से मौसम लगभग साफ बना हुआ था, लेकिन 26 जनवरी की दोपहर से आए इस बदलाव ने एक बार फिर ठंड और गलन बढ़ने के संकेत दे दिए हैं।
🌾 किसानों के लिए जरूरी सलाह
यह समय किसानों के लिए बेहद अहम है। मौसम में बदलाव को देखते हुए सिंचाई और फसल पर छिड़काव (स्प्रे) के कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। यदि आपके क्षेत्र में बादल छाए हुए हैं या बारिश की संभावना है, तो कीटनाशक या अन्य दवाओं का छिड़काव अगले दो दिनों के लिए टालना बेहतर रहेगा, क्योंकि बारिश में स्प्रे की गई दवा बह सकती है और उसका प्रभाव नहीं मिलता।
मौसम के साफ होने की संभावना 28 जनवरी के बाद यानी 29 और 30 जनवरी को जताई जा रही है। ऐसे में किसान इन दिनों में खाद, पानी और स्प्रे से जुड़े कार्य कर सकते हैं।
🌱 फसलों की देखभाल पर विशेष ध्यान
इस समय गेहूं, चना और सरसों जैसी रबी फसलों में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों के अनुसार फसल की अधिक बढ़वार को नियंत्रित करने के लिए पीजीआर (PGR) का स्प्रे किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए मौसम का साफ होना बेहद जरूरी है।
☁️ अगले 48 घंटे संवेदनशील
कुल मिलाकर, आने वाले 48 घंटे उत्तर भारत के मौसम के लिए काफी संवेदनशील रहने वाले हैं। बारिश और बादलों की वजह से तापमान में गिरावट आएगी और ठंड के साथ गलन बढ़ेगी। किसानों को सलाह दी गई है कि वे यह जानकारी अन्य किसान भाइयों के साथ भी साझा करें, ताकि समय रहते फसलों को नुकसान से बचाया जा सके और किसी भी आर्थिक हानि से बचाव हो सके।