Haryana Police Suspend: हरियाणा के रेवाड़ी जिला जेल से दो कैदियों के फरार होने के मामले में जेल प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। डीजी जेल Alok Mittal ने सात जेल कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इनमें पांच हेड वार्डर और दो वॉर्डर शामिल हैं।
यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसमें जेल स्टाफ की गंभीर लापरवाही सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की अनदेखी और सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन न करने के कारण ही दोनों कैदी जेल से फरार होने में सफल रहे।
प्रारंभिक जांच में लापरवाही की पुष्टि
डीजी जेल के निर्देश पर की गई जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जेल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था में कई स्तरों पर कमी थी। निगरानी और सतर्कता में ढिलाई के चलते कैदियों को फरार होने का मौका मिला।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। विभागीय जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद और कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी
यह घटना बीते शुक्रवार की बताई जा रही है, जब दो हवालाती बंदी जेल से फरार हो गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
तेजी से कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दोनों आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान फैजान (25), निवासी टांडा, जिला रामपुर (उत्तर प्रदेश) और जाहिद (21), निवासी मकसूदपुरा, जिला इटावा (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। दोनों को रामपुर क्षेत्र के आसपास से पकड़ा गया।
ऑनलाइन ठगी के मामलों में थे बंद
जानकारी के अनुसार, दोनों आरोपी ऑनलाइन ठगी के मामलों में जेल में बंद थे। उनकी फरारी के बाद जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।
हालांकि, आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी से पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में कर लिया। इसके बावजूद, यह घटना जेल सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को उजागर करती है।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
घटना के बाद जेल विभाग ने राज्यभर की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के आदेश दिए हैं। अधिकारियों को सतर्कता बढ़ाने और सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही, निगरानी प्रणाली को और बेहतर बनाने, स्टाफ की जिम्मेदारी तय करने और नियमित निरीक्षण बढ़ाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।