Environmental News: हरियाणा के इस जिले में नहीं कटेंगे 12000 पेड़, कोर्ट ने लगाई रोक

Punjab Haryana High Court stops tree cutting in Rohtak Sector 6 forest area

Environmental News: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजय बेरी की खंडपीठ ने रोहतक के सेक्टर-6 में स्थित 38 एकड़ के प्राकृतिक जंगल को वाणिज्यिक क्षेत्र में बदलने की योजना पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की वृक्ष कटाई पर तत्काल रोक लगा दी है।

यह क्षेत्र शहर के मध्य स्थित है और इसे रोहतक का ‘हरा फेफड़ा’ कहा जाता है। जनहित याचिका में बताया गया कि यहां 12 हजार से अधिक पेड़ मौजूद हैं, जो वर्ष 2002 से स्वाभाविक रूप से विकसित हुए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का उल्लंघन करते हुए बिना केंद्र सरकार की अनुमति के 19 जनवरी से पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई

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याचिका में सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया कि इस प्रकार की कटाई संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार का उल्लंघन है।

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने सवाल उठाया कि याचिकाकर्ता राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) क्यों नहीं गया, जबकि हरियाणा सरकार की वर्ष 2025 की अधिसूचना को लेकर वहां पहले से मामला लंबित है।

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इस पर मुख्य न्यायाधीश ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा—
30 साल पुराने पेड़ क्यों काट रहे हो? क्या तुम्हारे बच्चे-पोते सांस नहीं लेंगे?

अदालत ने अधिकार क्षेत्र के प्रश्न को सुरक्षित रखते हुए हरियाणा सरकार और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA) को निर्देश दिया कि वे वृक्ष कटाई के लिए प्राप्त किसी भी प्रकार की अनुमति का पूरा विवरण अगली सुनवाई में प्रस्तुत करें

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साथ ही न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया कि अगली सुनवाई की तारीख तक क्षेत्र में किसी भी तरह की पेड़ कटाई नहीं की जाएगी। अब अदालत इस बात पर विचार करेगी कि ऐसे मामलों की सुनवाई अनुच्छेद 226 के तहत की जाए या फिर मामला NGT को स्थानांतरित किया जाए

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