Nursing Home Policy Haryana:हरियाणा सरकार ने राज्य में आवासीय क्षेत्रों में हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में पूरे राज्य की लाइसेंसी रिहायशी प्लॉट वाली कॉलोनियों में नर्सिंग होम स्थापित करने के लिए एक व्यापक पॉलिसी को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले का उद्देश्य रिहायशी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को दूर करना और लोगों को उनके घरों के नजदीक बेहतर मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
रिहायशी कॉलोनियों में अब घर के पास मिलेंगी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं!
हरियाणा कैबिनेट ने लाइसेंसी रिहायशी प्लॉट वाली कॉलोनियों में नर्सिंग होम खोलने की नई पॉलिसी को हरी झंडी दे दी है।
अब निवासियों को छोटी-बड़ी चिकित्सा जरूरतों के लिए दूर नहीं जाना होगा; प्राथमिक और आपातकालीन सेवाएं उनके घर के ठीक पास उपलब्ध होंगी।
सरकार द्वारा मंजूर इस पॉलिसी के तहत लाइसेंसी कॉलोनियों के रिहायशी प्लॉट पर नर्सिंग होम स्थापित करने की अनुमति आवश्यक कन्वर्ज़न चार्ज के भुगतान के बाद दी जाएगी। यह अनुमति केवल योग्य डॉक्टरों को ही मिलेगी। इसमें एलोपैथिक या आयुष पद्धति से जुड़े वे डॉक्टर शामिल होंगे, जिनके पास मेडिकल काउंसिल या आयुष काउंसिल में वैध पंजीकरण हो, जो वर्तमान में प्रैक्टिस कर रहे हों और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की स्थानीय शाखा में रजिस्टर्ड हों। इसके लिए डॉक्टरों को आवेदन के साथ एक शपथ पत्र भी देना अनिवार्य होगा।
सरकार का मानना है कि नर्सिंग होम न केवल मेडिकल जरूरतों को पूरा करते हैं, बल्कि बुजुर्गों, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले लोगों के लिए बेहद अहम हैं। वर्तमान में बढ़ती आबादी और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए हर सेक्टर में ऐसे संस्थानों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 की गाइडलाइंस में प्रत्येक 50 एकड़ क्षेत्र में दो नर्सिंग होम के लिए 1,000 वर्ग मीटर भूमि का प्रावधान था, लेकिन हाइपर पोटेंशियल जोन में क्षेत्रीय सीमा को 100 एकड़ से घटाकर 25 एकड़ कर दिए जाने के कारण आवंटन प्रक्रिया जटिल हो गई थी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की मांग और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद सरकार ने रिहायशी प्लॉट पर नर्सिंग होम की अनुमति देने का निर्णय लिया।
एरिया और लोकेशन से जुड़े नियम
नई पॉलिसी के अनुसार, हाइपर और हाई पोटेंशियल ज़ोन में न्यूनतम प्लॉट साइज 350 वर्ग गज रखा गया है, जबकि मीडियम और लो पोटेंशियल ज़ोन के लिए यह 250 वर्ग गज निर्धारित किया गया है। नर्सिंग होम केवल सेक्टर या मुख्य सड़कों के किनारे स्थित सर्विस रोड पर ही स्थापित किए जा सकेंगे। इसके अलावा, अनुमति केवल उन्हीं लाइसेंसी कॉलोनियों में दी जाएगी, जहां सभी आंतरिक विकास कार्य पूरे हो चुके हों और कंप्लीशन या पार्ट-कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया गया हो।
एक सेक्टर में अधिकतम चार नर्सिंग होम साइट्स की अनुमति होगी, जबकि सेक्टर को विभाजित करने वाली सड़कों पर केवल एक ही साइट को मंजूरी दी जाएगी। सभी अनुमतियां 10 नवंबर 2017 की अधिसूचना के अनुरूप दी जाएंगी।
तय की गई फीस
सरकार ने कन्वर्ज़न फीस भी स्पष्ट कर दी है। हाइपर पोटेंशियल ज़ोन के लिए 10,000 रुपये प्रति वर्ग गज, हाई ज़ोन के लिए 8,000 रुपये, मीडियम ज़ोन के लिए 6,000 रुपये और लो पोटेंशियल ज़ोन के लिए 4,000 रुपये प्रति वर्ग गज फीस तय की गई है। इसके अलावा किसी प्रकार का अतिरिक्त एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (EDC) लागू नहीं होगा।
सरकार का यह फैसला शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।