NH15 project: केंद्र सरकार ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली भारत की पहली अंडरवॉटर रोड-कम-रेल टनल परियोजना को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCEA) ने NH-15 पर गोहपुर से NH-715 पर नुमालीगढ़ तक 4 लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी कॉरिडोर के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 18,662 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का सबसे अहम हिस्सा ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली लगभग 15.79 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब रोड-कम-रेल टनल है। यह टनल एक साथ सड़क और रेल यातायात को सुविधा प्रदान करेगी, जिससे यात्रा समय में भारी कमी आएगी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नया आयाम मिलेगा।
यात्रा समय और दूरी में होगी कमी
वर्तमान में नुमालीगढ़ और गोहपुर के बीच लगभग 240 किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब 6 घंटे लगते हैं। यह मार्ग काजीरंगा नेशनल पार्क और अन्य इलाकों से होकर गुजरता है, जिससे यातायात धीमा रहता है। टनल और नए कॉरिडोर के निर्माण के बाद यात्रा दूरी और समय दोनों में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है, जिससे यात्रियों और माल ढुलाई दोनों को लाभ होगा।
नॉर्थ-ईस्ट राज्यों को मिलेगा बड़ा फायदा
यह परियोजना केवल असम ही नहीं, बल्कि अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बेहतर सड़क और रेल संपर्क से व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही लॉजिस्टिक्स लागत कम होने से स्थानीय उद्योगों और कारोबारियों को भी सीधा फायदा होगा।
रेल और सड़क नेटवर्क का होगा बेहतर एकीकरण
परियोजना के तहत दो प्रमुख रेलवे लाइनों को भी जोड़ा जाएगा। गोहपुर की ओर रंगिया-मुकोंगसेलेक रेल सेक्शन और नुमालीगढ़ की ओर फुरकटिंग-मरियानी लूप लाइन सेक्शन को आपस में कनेक्ट किया जाएगा। इससे मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी।
इसके अलावा यह कॉरिडोर कई आर्थिक, सामाजिक, पर्यटन और लॉजिस्टिक केंद्रों को जोड़ेगा। जानकारी के अनुसार परियोजना 11 आर्थिक नोड्स, 3 सामाजिक नोड्स, 2 पर्यटन नोड्स और 8 लॉजिस्टिक नोड्स को कनेक्ट करेगी। साथ ही 4 प्रमुख रेलवे स्टेशनों, 2 हवाई अड्डों और 2 इनलैंड वाटरवे के साथ भी बेहतर संपर्क स्थापित होगा।
रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों के अनुसार ब्रह्मपुत्र के नीचे बनने वाली यह टनल सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र देश की सुरक्षा और सीमावर्ती इलाकों के लिए संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में तेज और भरोसेमंद कनेक्टिविटी सेना और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी फायदेमंद साबित होगी।
रोजगार और विकास को मिलेगा बढ़ावा
इतने बड़े स्तर की परियोजना के निर्माण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। निर्माण कार्य, परिवहन, पर्यटन और सहायक उद्योगों में नई संभावनाएँ पैदा होंगी, जिससे क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली रोड-कम-रेल टनल न केवल भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का उदाहरण होगी, बल्कि उत्तर-पूर्व के विकास को नई गति देने वाली एक ऐतिहासिक परियोजना भी साबित हो सकती है।
