Jungle Safari Project: गुरुग्राम-नूंह जंगल सफारी प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट का झटका, अरावली क्षेत्र को फिलहाल न छेड़ने के निर्देश

Safari Nuh

Jungle Safari Project: सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को गुरुग्राम और नूंह जिले में प्रस्तावित जंगल सफारी प्रोजेक्ट के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) जमा करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब तक विशेषज्ञ अरावली रेंज की स्पष्ट परिभाषा तय नहीं कर देते, तब तक इस क्षेत्र में किसी भी बड़े प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अरावली सिर्फ किसी एक राज्य की नहीं है, बल्कि यह एक विस्तृत पर्वतमाला है जो कई राज्यों से होकर गुजरती है। इसलिए इससे जुड़े किसी भी प्रोजेक्ट पर फैसला करते समय व्यापक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।


सरकार ने क्या दलील दी

सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से वकील ने कहा कि जंगल सफारी प्रोजेक्ट के दायरे को पहले प्रस्तावित 10,000 एकड़ से घटाकर करीब 3,300 एकड़ कर दिया गया है। सरकार चाहती थी कि डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट को सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) के पास जांच के लिए भेजने की अनुमति दी जाए।

Nuh goli
Gurugram Breaking News: हरियाणा में दूल्हे ने लाइटमैन को गोली मारी, मातम में बदली शादी की खुशियां

हालांकि कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और कहा कि अरावली रेंज की परिभाषा तय करना विशेषज्ञों का काम है। जब तक एक्सपर्ट कमेटी अपनी रिपोर्ट नहीं दे देती, तब तक इस मामले में आगे बढ़ना उचित नहीं होगा।


पहले भी लग चुकी है रोक

सुप्रीम कोर्ट पहले ही अक्टूबर 2025 में प्रस्तावित मेगा अरावली ज़ू सफारी प्रोजेक्ट पर रोक लगा चुका है। उस समय कोर्ट ने कहा था कि पर्यावरणीय प्रभाव का विस्तृत आकलन किए बिना इतने बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी जा सकती।

यह प्रोजेक्ट दुनिया के सबसे बड़े ज़ू-सफारी प्रोजेक्ट्स में से एक बताया जा रहा था। योजना के अनुसार यहां बड़ी बिल्लियों के लिए विशेष ज़ोन, पक्षियों के संरक्षण क्षेत्र और विभिन्न प्रजातियों के लिए अलग-अलग हिस्से विकसित किए जाने थे।

WOMEN BPL 2
Haryana BPL Family: हरियाणा की BPL महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, सरकार ने की नई पहल

याचिका में क्या कहा गया

इस मामले में पांच रिटायर्ड भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों और NGO ‘पीपल फॉर अरावलीज़’ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि अरावली रेंज पहले ही खनन और शहरीकरण के कारण काफी प्रभावित हो चुकी है और ऐसे में बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करना पर्यावरण के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि अरावली क्षेत्र भूजल संरक्षण, जलवायु संतुलन और वन्यजीवों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य से पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा हो सकता है।


अरावली क्षेत्र का महत्व

अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे पुरानी पर्वतमालाओं में से एक मानी जाती है। यह दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात तक फैली हुई है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली क्षेत्र दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण और धूल को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला—रिहायशी कॉलोनियों में लागू होगी खास नीति, लोगों को राहत
Haryana News: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला—रिहायशी कॉलोनियों में लागू होगी खास नीति, लोगों को राहत

इसके अलावा यह क्षेत्र कई वन्यजीवों और पक्षियों का प्राकृतिक आवास भी है, जिससे इसका संरक्षण और भी जरूरी हो जाता है।


पर्यटन बढ़ने से दबाव भी बढ़ा

पिछले कुछ वर्षों में गुरुग्राम और आसपास के अरावली क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। खासकर वीकेंड पर दिल्ली-एनसीआर से बड़ी संख्या में लोग यहां घूमने आते हैं। लेपर्ड ट्रेल जैसे स्थान युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो चुके हैं।

पर्यटन बढ़ने के साथ-साथ यहां कैफे, रिसॉर्ट और अस्थायी फूड कार्ट की संख्या भी बढ़ी है, जिससे पर्यावरण पर दबाव बढ़ने की चिंता भी सामने आई है।

Gurugram में लगी आग
Gurugram News: हरियाणा के गुरुग्राम में देर रात भीषण आग, धमाकों की आवाज से दहले लोग

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *