Job Crisis: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव को लेकर दुनिया भर में चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच लैटवियन मूल के कंप्यूटर वैज्ञानिक और अमेरिका की लुइसविल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. रोमन याम्पोलस्की ने एक ऐसी चेतावनी दी है, जिसने तकनीकी और आर्थिक जगत में बहस छेड़ दी है।
एक लोकप्रिय पॉडकास्ट ‘द डायरी ऑफ ए सीईओ’ में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि 2027 तक आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) आने की संभावना है। AGI को ऐसा AI माना जाता है जो लगभग हर बौद्धिक कार्य में इंसानों के बराबर या उनसे बेहतर प्रदर्शन कर सकेगा।
“कोई भी नौकरी पूरी तरह सुरक्षित नहीं”
डॉ. याम्पोलस्की के अनुसार, AI के लगातार विकसित होने से आने वाले वर्षों में नौकरियों की प्रकृति पूरी तरह बदल सकती है। उनका कहना है कि पहले की तकनीकें इंसानों की मदद के लिए बनाई जाती थीं, लेकिन AI का लक्ष्य कई मामलों में इंसानों की जगह लेना भी हो सकता है।
उन्होंने दावा किया कि कंप्यूटर आधारित कार्य सबसे पहले ऑटोमेट होंगे और इसके बाद ह्यूमनॉइड रोबोट्स के विकास के साथ फिजिकल लेबर भी प्रभावित हो सकता है। उनके अनुमान के अनुसार, अगले पांच वर्षों में रोजगार के बड़े हिस्से पर असर पड़ सकता है, हालांकि कई अन्य विशेषज्ञ इस तरह के अनुमानों को अत्यधिक आक्रामक मानते हैं और कहते हैं कि तकनीकी बदलाव आमतौर पर धीरे-धीरे होता है।
किन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा असर?
विशेषज्ञों के मुताबिक, सबसे पहले उन नौकरियों पर असर पड़ सकता है जो डेटा प्रोसेसिंग, कंटेंट क्रिएशन, कस्टमर सपोर्ट, अकाउंटिंग और बेसिक प्रोग्रामिंग जैसे कार्यों से जुड़ी हैं।
इसके बाद ऑटोमेशन और रोबोटिक्स के बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्रों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि AI पूरी तरह नौकरियां खत्म करने के बजाय नई तरह की नौकरियां भी पैदा कर सकता है, जैसा कि पिछली औद्योगिक क्रांतियों में हुआ था।
भविष्य में कौन-सी नौकरियां बच सकती हैं
डॉ. याम्पोलस्की ने कुछ ऐसे क्षेत्रों का उल्लेख किया, जहां इंसानों की भूमिका लंबे समय तक बनी रह सकती है—
- पर्सनल सर्विसेज – खासकर ऐसे काम जिनमें भरोसा और व्यक्तिगत संपर्क महत्वपूर्ण हो।
- इमोशनल और केयर आधारित कार्य – जैसे थेरेपी, काउंसलिंग या कुछ सामाजिक सेवाएं।
- AI ओवरसाइट और रेगुलेशन – AI सिस्टम्स की निगरानी और सुरक्षा से जुड़े काम।
- AI इंटरमीडियरी और एक्सप्लेनर – कंपनियों और आम लोगों को AI समझाने और लागू करने वाले विशेषज्ञ।
- स्पेशलाइज्ड AI हैंडलिंग – शुरुआती दौर में प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग या विशेष तकनीकी भूमिकाएं।
हालांकि उनका कहना है कि इन नौकरियों की संख्या सीमित हो सकती है और हर किसी के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं होंगे।
यूनिवर्सल बेसिक इनकम पर चर्चा
डॉ. याम्पोलस्की का मानना है कि अगर AI से उत्पादकता बहुत बढ़ती है और रोजगार कम होते हैं, तो कई देशों को यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) जैसे विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है।
UBI एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें सरकार नागरिकों को न्यूनतम आय की गारंटी देती है, ताकि रोजगार की कमी के बावजूद लोग अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें। हालांकि यह विचार अभी भी दुनिया के अधिकांश देशों में बहस का विषय है।
भारत जैसे देशों के लिए चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि AI से होने वाले बदलाव भारत जैसे देशों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होंगे, जहां बड़ी युवा आबादी रोजगार की तलाश में है। अगर तकनीक तेजी से कामों को ऑटोमेट करती है, तो स्किल डेवलपमेंट और नई शिक्षा नीतियां बेहद जरूरी हो जाएंगी।
नीति विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारों को अभी से डिजिटल स्किल्स, नई तकनीकों और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य की चुनौतियों से निपटा जा सके।
सभी विशेषज्ञ सहमत नहीं
कई टेक्नोलॉजी विश्लेषक और अर्थशास्त्री इस बात से सहमत हैं कि AI बड़े बदलाव लाएगा, लेकिन वे यह भी कहते हैं कि 99 प्रतिशत नौकरियां खत्म होने जैसी भविष्यवाणियां निश्चित नहीं हैं। उनका तर्क है कि हर नई तकनीक के साथ नई नौकरियां भी पैदा होती हैं और समाज धीरे-धीरे खुद को नए हालात के अनुसार ढाल लेता है।