Haryana Police News: न्यायिक प्रक्रिया में बाधा, अदालतों के आदेशों की अवहेलना और ड्यूटी में लापरवाही के मामलों को लेकर पानीपत कोर्ट ने पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। विभिन्न मामलों में अदालतों ने SHO स्तर के अधिकारियों से लेकर कांस्टेबल तक पर संज्ञान लेते हुए नोटिस, समन, आरोप तय करने और विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं।
SHO अनिल (थाना सेक्टर-29, पानीपत)
कोर्ट ने एक मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए SHO अनिल के संबंध में एसपी पानीपत से रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट पर विचार अभी लंबित है। मामले की अगली सुनवाई 7 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
SHO श्रीनिवास (थाना किला, पानीपत)
अदालत ने पुलिस कार्यप्रणाली पर स्वतः संज्ञान लेते हुए BNSS की धारा 223 के तहत SHO श्रीनिवास को नोटिस जारी किया है। साथ ही एसपी पानीपत से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
पूर्व SHO राजीव कुमार (थाना तहसील कैंप)
एक मामले में आरोपी को नाबालिग घोषित करने से संबंधित रिपोर्ट और हलफनामा समय पर दाखिल न करने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। बार-बार अवसर देने के बावजूद जवाब पेश न होने पर उनके खिलाफ BNS की धारा 208(b) और 210(b) के तहत आरोप तय कर दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी 2026 को होगी।
हेड कांस्टेबल राजबीर सिंह (समन स्टाफ, पानीपत)
दो गवाहों के खिलाफ जारी जमानती वारंट की सही तामील न करने और केवल फोन पर सूचना देकर रिपोर्ट वापस करने के मामले में अदालत ने इसे वारंट के निष्पादन में जानबूझकर बाधा माना है। उनके खिलाफ BNS की धारा 207 के तहत संज्ञान लेते हुए 8 अप्रैल 2026 के लिए समन जारी किए गए हैं।
कांस्टेबल अजय
व्यक्तिगत रूप से समन तामील होने के बावजूद 3 जुलाई 2024 को अदालत में गवाही के लिए पेश न होने पर अदालत ने इसे आदेशों की अवहेलना माना है। उनके खिलाफ धारा 174 आईपीसी के तहत अपराध मानते हुए 19 दिसंबर 2025 के लिए समन जारी किए गए हैं।
कांस्टेबल सिया राम
न्यायिक आदेशों की अवहेलना के मामले में अदालत ने कांस्टेबल सिया राम के खिलाफ BNS की धारा 207 के तहत आरोप तय किए हैं। उन्हें ₹30,000 के बेल बॉन्ड और बैंक एफडीआर जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल 2026 को होगी।
अजय (थाना तहसील कैंप)
नायब कोर्ट के माध्यम से अदालत का संदेश प्राप्त होने के बावजूद संबंधित रिपोर्ट न भिजवाने के मामले में एसपी पानीपत ने उनके खिलाफ अलग से विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है।
गवाही से गैरहाजिरी पर तीन पुलिसकर्मियों को सजा
न्यायिक आदेशों की अवहेलना और अदालत में गवाही के लिए उपस्थित न होने के मामलों में पानीपत के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की प्री-लोक अदालत पहले ही तीन पुलिसकर्मियों को दोषी ठहरा चुकी है।
SI विनोद कुमार (चौकी थर्मल, पानीपत)
‘स्टेट बनाम गौरव’ सत्र मामले में गवाह के रूप में तलब किए जाने के बावजूद 29 मई 2024 को अदालत में पेश नहीं हुए। अदालत ने इसे धारा 174 आईपीसी के तहत अपराध माना। आरोपी ने जुर्म स्वीकार करने पर चेतावनी देकर रिहा किया गया।
महिला कांस्टेबल रोजी (महिला थाना, पानीपत)
‘स्टेट बनाम लकी’ केस में 30 मई 2024 को गवाही के लिए उपस्थित नहीं हुईं। 26 जुलाई 2024 को लोक अदालत में उन्होंने जुर्म कबूल किया। अदालत ने दोषी ठहराते हुए कड़ी चेतावनी दी।
महिला कांस्टेबल सोनिया (थाना इसराना, पानीपत)
‘स्टेट बनाम अर्जुन’ मामले में गवाही के लिए पेश न होने पर धारा 174 आईपीसी के तहत कार्रवाई की गई। अदालत में अपराध स्वीकार करने पर उन्हें चेतावनी देकर रिहा किया गया।
निष्कर्ष:
पानीपत की अदालतों ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना, गवाही से गैरहाजिरी और पुलिसिया लापरवाही अब सीधे कानूनी कार्रवाई और सजा का आधार बनेगी।
