Haryana MSME: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया गया। कैबिनेट ने हरियाणा उद्यम एवं रोजगार नीति (HEEP)-2020 और इससे जुड़ी 16 प्रोत्साहन योजनाओं में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय मुख्यमंत्री द्वारा बजट 2025-26 में की गई घोषणा के अनुरूप है।
सरकार का उद्देश्य अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर संचालित औद्योगिक इकाइयों को लंबे समय से आ रही व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करना है। इसके तहत निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाली मौजूदा औद्योगिक इकाइयों को भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU) और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) से छूट देने का प्रावधान किया गया है।
नई व्यवस्था के अनुसार, कम से कम 50 उद्यमी, जिनकी औद्योगिक इकाइयां न्यूनतम 10 एकड़ की सतत भूमि पर स्थित हैं, एक सरकारी पोर्टल के माध्यम से सामूहिक रूप से नियमितीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। शर्त यह है कि इन इकाइयों ने 1 जनवरी 2021 से पहले वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया हो। आवेदन पर अंतिम निर्णय होने तक, इन इकाइयों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अस्थायी रूप से नियमित माना जाएगा।
कैबिनेट ने HEEP-2020 की धारा 14.14 में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इसके तहत हरियाणा ग्रामीण औद्योगिक विकास योजना के अंतर्गत संचालित ग्रामीण सूक्ष्म उद्यमों के साथ-साथ पात्र मौजूदा MSME क्लस्टर्स को भी CLU/NOC से छूट का लाभ दिया जाएगा।
इसके अलावा, मौजूदा MSMEs के लिए CLU/NOC की अनिवार्यता समाप्त करने के उद्देश्य से नीति के तहत संचालित 16 प्रमुख प्रोत्साहन योजनाओं में भी संशोधन को स्वीकृति दी गई है। इनमें एसएमई एक्सचेंज, प्रौद्योगिकी अधिग्रहण, गुणवत्ता प्रमाणन, पेटेंट पंजीकरण, ऊर्जा व जल संरक्षण, बाजार विकास, अनुसंधान एवं विकास, क्रेडिट गारंटी, ब्याज सब्सिडी, माल ढुलाई सहायता और औद्योगिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। संशोधनों के बाद पात्र उद्यम बिना अतिरिक्त अनुपालन बाधाओं के इन योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
कार्यान्वयन में स्पष्टता लाने के लिए कैबिनेट ने “मौजूदा उद्यम” और “नया सूक्ष्म उद्यम” की परिभाषाएं भी तय कर दी हैं। 1 जनवरी 2021 से पहले उत्पादन शुरू करने वाली इकाइयां मौजूदा उद्यम मानी जाएंगी, जबकि 1 जनवरी 2021 के बाद और 31 दिसंबर 2025 से पहले शुरू हुई सूक्ष्म इकाइयों को नया सूक्ष्म उद्यम माना जाएगा।