Haryana forest scam:,रातों-रात काट दिए हजारों पेड़! पंचकूला वन घोटाले में 3 बड़े अफसर सस्पेंड

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Haryana forest scam: हरियाणा के पंचकूला जिले से जुड़े आसरेवाली वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में अवैध पेड़ कटाई के बड़े मामले में वन विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। वन मंत्री राव नरबीर सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद विभाग ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

किन अधिकारियों पर गिरी गाज

निलंबित किए गए अधिकारियों में वाइल्ड लाइफ डीएफओ राजेंद्र प्रसाद डांगी, टेरिटोरियल डीएफओ विशाल कौशिक और वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर सुरजीत सिंह शामिल हैं। इससे पहले इस मामले में वन दरोगा रघुविंद्र सिंह को भी सस्पेंड कर गिरफ्तार किया जा चुका है।

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सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार देर शाम हुई बैठक में पहले इंस्पेक्टर सुरजीत सिंह पर कार्रवाई की गई, इसके बाद क्रमशः दोनों डीएफओ को सस्पेंशन लेटर जारी किए गए। सभी अधिकारियों को जांच पूरी होने तक मुख्यालय में ही रहने के निर्देश दिए गए हैं।

क्या है पूरा मामला

यह मामला पंचकूला स्थित आसरेवाली संरक्षित वन क्षेत्र से जुड़ा है, जहां खैर (कटच) के मूल्यवान पेड़ों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई की गई। रिपोर्ट के अनुसार, रात के समय साइलेंट कटर मशीनों से सैकड़ों से हजारों पेड़ काटे गए और लकड़ी को ऊंटों व अन्य माध्यमों से बाहर तस्करी किया गया।

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खैर की लकड़ी बाजार में महंगी होने के कारण इस पर वन माफिया की नजर रहती है, जिससे इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं।

जांच में क्या हुआ अब तक

मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रही है। अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें वन विभाग के कर्मचारी और तस्कर दोनों शामिल हैं। जांच के दौरान अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई, जिसके चलते सस्पेंशन की कार्रवाई की गई।

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स्टाफ की कमी बनी बड़ी वजह

इस पूरे मामले ने वन विभाग की एक गंभीर समस्या को उजागर किया है। वाइल्ड लाइफ विंग में स्टाफ की भारी कमी है। एक डीएफओ के जिम्मे करीब 5 जिलों का कार्यभार है, जबकि उसके अधीन केवल 5 इंस्पेक्टर और 6 गार्ड ही हैं।

इसके विपरीत, टेरिटोरियल विंग में 5 डीएफओ, 20 रेंज अधिकारी, 60 ब्लॉक अधिकारी और 120 गार्ड तैनात हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टाफ की कमी के कारण निगरानी कमजोर होती है, जिससे वन माफिया को सक्रिय होने का मौका मिलता है।

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पंचकूला का यह मामला न केवल अवैध कटाई का है, बल्कि यह वन विभाग की कार्यप्रणाली, निगरानी तंत्र और संसाधनों की कमी पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि एसआईटी जांच में और क्या खुलासे होते हैं और दोषियों पर क्या सख्त कार्रवाई की जाती है।

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