HARYANA BREAKING: हरियाणा के जेल विभाग में कार्यरत जेल वार्डनों और हेड वार्डनों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत की घोषणा की है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने ऐलान किया है कि अब जेल वार्डनों को पुलिस कर्मियों के समान भत्ते दिए जाएंगे। यह घोषणा करनाल स्थित जेल अकादमी में आयोजित दीक्षांत परेड समारोह के दौरान की गई।
समारोह में उपस्थित अधिकारियों और प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि जेल विभाग के कर्मचारी भी पुलिस की तरह चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरी ड्यूटी निभाते हैं, लेकिन अब तक उन्हें कई सुविधाओं में समानता नहीं मिल पा रही थी। इस असमानता को दूर करने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है।
हेड वार्डन बनने में अब 18 साल का समय
मुख्यमंत्री ने बताया कि अब जेल वार्डन से हेड वार्डन बनने के लिए पहले की तरह 20 वर्ष की सेवा की बजाय केवल 18 वर्ष की सेवा ही पर्याप्त होगी, बशर्ते कर्मचारी का सेवा रिकॉर्ड अच्छा हो। इससे कर्मचारियों में पदोन्नति को लेकर उत्साह बढ़ेगा और कार्यक्षमता में भी सुधार होगा।
भत्तों में बड़ा इजाफा
सीएम नायब सैनी ने बताया कि जेल वार्डनों और हेड वार्डनों को पुलिस विभाग के कांस्टेबलों के समान भत्ता दिया जाएगा। वर्तमान में जेल वार्डनों को 600 रुपये प्रतिमाह राशन भत्ता मिलता है, जिसे आगामी वित्त वर्ष में बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा।
इसके अलावा, वर्तमान में 50 रुपये प्रतिमाह मिलने वाला कन्वेंस भत्ता 14 गुना बढ़ाकर 720 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। वहीं, वर्दी भत्ता भी 3 हजार रुपये प्रतिवर्ष से बढ़ाकर साढ़े 7 हजार रुपये प्रतिवर्ष कर दिया जाएगा।
सेवा विस्तार का भी मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि करेक्शनल मेडल प्राप्त करने वाले जेल विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया जाएगा। यह सुविधा पहले केवल पुलिस विभाग में लागू थी, जिसे अब जेल विभाग तक भी विस्तारित किया जा रहा है।
जेल कर्मियों के मनोबल में होगी बढ़ोतरी
सीएम नायब सैनी ने कहा कि जेल कर्मचारी समाज सुधार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार का उद्देश्य है कि उन्हें सम्मान, सुरक्षा और सुविधाएं दी जाएं, ताकि वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।
इस घोषणा से हरियाणा के जेल वार्डनों और हेड वार्डनों में खुशी की लहर है और इसे लंबे समय से चली आ रही मांग की पूर्ति के रूप में देखा जा रहा है।