Government Records, RTO Scam: हरियाणा के करनाल जिले से सरकारी रिकॉर्ड में भारी लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग की मृत पत्नी के नाम पर हरियाणा के 16 जिलों में करीब 90 वाहन दर्ज कर दिए गए, जिसके चलते उसके पति की बुढ़ापा पेंशन बंद कर दी गई। इस गलती ने न केवल बुजुर्ग को आर्थिक संकट में डाल दिया है, बल्कि सरकारी सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित रविंद्र, उम्र लगभग 70 वर्ष, करनाल जिले के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी सविता की मौत वर्ष 2019 में हो चुकी है। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उनकी पत्नी को न सिर्फ जीवित दिखाया गया, बल्कि उसे करोड़ों रुपये की संपत्ति का मालिक भी बना दिया गया। रविंद्र के अनुसार, उनके पास केवल एक पुरानी बाइक और एक टूटी-फूटी एक्टिवा स्कूटी है। उनके या उनकी पत्नी के नाम पर कोई कार या ट्रक नहीं है।
रविंद्र ने बताया कि जब वे 60 वर्ष के हुए थे, तब उनकी बुढ़ापा पेंशन स्वीकृत हुई थी। शुरुआत में पेंशन नियमित रूप से आती रही। करीब डेढ़ साल पहले उनकी पेंशन सात महीने के लिए बंद कर दी गई थी, लेकिन बाद में फिर से शुरू हो गई। हालांकि नवंबर 2025 से एक बार फिर उनकी पेंशन रोक दी गई।
दिसंबर महीने में जब रविंद्र बैंक पहुंचे तो उन्हें पता चला कि नवंबर माह की पेंशन उनके खाते में नहीं आई है, जबकि अन्य पेंशनधारकों को भुगतान हो चुका था। इसके बाद वे समाज कल्याण विभाग के कार्यालय पहुंचे, जहां उन्हें बताया गया कि उनकी पेंशन काट दी गई है। जब उन्होंने अपनी फैमिली आईडी ऑनलाइन निकाली तो उसमें जो जानकारी सामने आई, उसने उनके होश उड़ा दिए।
फैमिली आईडी के अनुसार, रविंद्र की मृत पत्नी सविता के नाम पर हरियाणा के 16 जिलों में 90 वाहन दर्ज दिखाए गए हैं। इन जिलों में फरीदाबाद, सोनीपत, करनाल, पानीपत, रेवाड़ी, नारनौल, बहादुरगढ़, हिसार, गुरुग्राम, कुरुक्षेत्र, सिरसा और रोहतक सहित कई जिले शामिल हैं। इन आरटीओ रिकॉर्ड्स में बाइक, स्कूटी, कार और यहां तक कि ट्रक भी पत्नी के नाम पर चढ़े हुए बताए गए हैं।
सबसे हैरानी की बात यह है कि कुछ वाहन ऐसे भी दिखाए गए हैं, जिनका पंजीकरण वर्ष 2021 का है, जबकि रविंद्र की पत्नी की मृत्यु 2019 में हो चुकी थी। पीड़ित का आरोप है कि सरकारी सिस्टम की इसी बड़ी गलती के कारण उन्हें करोड़पति परिवार मान लिया गया और उनकी बुढ़ापा पेंशन बंद कर दी गई।
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार की बुढ़ापा पेंशन योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के जरूरतमंद नागरिकों को पेंशन दी जाती है। हालांकि जिन परिवारों की सालाना आय तीन लाख रुपये से अधिक होती है, उन्हें इस योजना से बाहर रखा जाता है। पत्नी के नाम पर 90 वाहन दर्ज होने से रविंद्र को इस श्रेणी में डाल दिया गया।
रविंद्र का कहना है कि वे पिछले दो महीनों से समाज कल्याण विभाग और अन्य संबंधित कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने लिखित शिकायतें दी हैं और मुख्यमंत्री विंडो पर भी मामला दर्ज कराया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस पूरे मामले पर करनाल के अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) योगेश मेहता ने कहा कि यह मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि फैमिली आईडी में कोई गलत अपडेट हुआ है, तो इसकी जांच करवाई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला न केवल एक बुजुर्ग की परेशानी को उजागर करता है, बल्कि सरकारी डेटा मैनेजमेंट और सत्यापन प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।