Aaj Ki Kahani: एक छोटे से गांव में एक बूढ़ा आदमी रहता था। वह अक्सर लोगों के बारे में बिना सोचे-समझे बातें करता रहता था। एक दिन उसने अपने पड़ोस में रहने वाले एक मेहनती और शांत स्वभाव के नौजवान के बारे में अफवाह फैला दी कि वह चोर है।
धीरे-धीरे यह बात पूरे गांव में फैल गई। लोगों ने उस नौजवान से दूरी बनानी शुरू कर दी। कोई उससे बात नहीं करता था, कोई उसके घर नहीं आता था। नौजवान हैरान और दुखी था, क्योंकि उसने कभी कोई गलत काम नहीं किया था।
कुछ दिनों बाद गांव में सचमुच चोरी हो गई। बिना किसी ठोस सबूत के, लोगों ने उसी नौजवान पर शक किया और पुलिस को खबर कर दी। पुलिस ने उसे पकड़ लिया और जेल में डाल दिया।
नौजवान ने अपनी सफाई देने की बहुत कोशिश की, लेकिन कोई उसकी बात सुनने को तैयार नहीं था। कुछ दिनों बाद असली चोर पकड़ा गया और सच्चाई सामने आई। नौजवान पूरी तरह निर्दोष साबित हुआ और उसे रिहा कर दिया गया।
जेल से बाहर आने के बाद नौजवान बहुत आहत था। उसने तय किया कि वह उस बूढ़े आदमी के खिलाफ पंचायत में न्याय की गुहार लगाएगा, जिसने उसकी इज्जत को ठेस पहुंचाई थी।
पंचायत बुलाई गई। सभी गांववाले इकट्ठा हुए। बूढ़े आदमी से पूछा गया कि उसने ऐसा क्यों किया। बूढ़ा आदमी बोला, “मैंने तो बस एक बात कही थी, मेरा इरादा किसी को नुकसान पहुंचाने का नहीं था।”
सरपंच ने उसकी बात ध्यान से सुनी और फिर एक कागज का टुकड़ा उसे देते हुए कहा, “तुम इस कागज पर वह सब लिखो जो तुमने उस नौजवान के बारे में कहा था। फिर इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में फाड़कर रास्ते में फेंकते हुए घर चले जाओ।”
बूढ़े आदमी ने वैसा ही किया।
अगले दिन पंचायत फिर बैठी। सरपंच ने बूढ़े आदमी से कहा, “अब जाओ और उन कागज के टुकड़ों को इकट्ठा करके वापस लाओ।”
बूढ़ा आदमी घबरा गया और बोला, “यह कैसे संभव है? हवा उन टुकड़ों को कहीं भी उड़ा ले गई होगी। अब उन्हें ढूंढना असंभव है।”
तब सरपंच मुस्कुराए और बोले, “जैसे तुम उन कागज के टुकड़ों को वापस नहीं ला सकते, वैसे ही तुम अपने बोले हुए शब्दों को भी वापस नहीं ले सकते। तुम्हारी एक छोटी सी अफवाह ने इस निर्दोष युवक की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है, जिसे अब पूरी तरह वापस नहीं लाया जा सकता।”
यह सुनकर बूढ़े आदमी को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने नौजवान से माफी मांगी। गांववालों ने भी अपनी भूल समझी और उस नौजवान को फिर से सम्मान देने लगे।
शिक्षा
शब्द बहुत शक्तिशाली होते हैं।
इसलिए बोलने से पहले सोचें।
अगर अच्छा नहीं कह सकते, तो चुप रहना ही बेहतर है।