Kurukshetra Inspector Suspend: हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले की पिपली अनाज मंडी में धान खरीद के दौरान फर्जी गेट पास काटने के मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन हुआ है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग ने पिपली के इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। साथ ही उनका तबादला कुरुक्षेत्र से पलवल जिले में कर दिया गया है।
हालांकि विभाग की ओर से सस्पेंशन का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया, लेकिन यह कार्रवाई मंडी में अनजान आईडी से गेट पास काटे जाने के मामले से जुड़ी मानी जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
विभाग के अनुसार, 6 अक्टूबर को पिपली अनाज मंडी में एक साथ कई गेट पास जारी किए गए थे। ये गेट पास किसी अनजान आईडी से काटे गए थे और उनकी लोकेशन भी सिस्टम से मेल नहीं खा रही थी।
मामला सामने आते ही अधिकारियों ने तुरंत इन गेट पास का भुगतान रोक दिया, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए।
3 करोड़ रुपए का भुगतान अटका
फर्जी गेट पास के कारण करीब 27 आढ़तियों का 2.5 से 3 करोड़ रुपए तक का भुगतान अटक गया।
इन गेट पास के जरिए दिखाया गया कि धान मंडी से उठाकर चार अलग-अलग राइस मिलों तक पहुंचाया गया है, लेकिन जांच में यह प्रक्रिया संदिग्ध पाई गई।
सीएम तक पहुंचा मामला
भुगतान अटकने से नाराज आढ़ती एसोसिएशन ने इस मुद्दे को सीधे सरकार तक पहुंचाया।
आढ़ती चंडीगढ़ पहुंचकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेश नागर से मिले और मामले में कार्रवाई की मांग की। इसके बाद जांच के आदेश दिए गए और अब विभाग ने सख्त कदम उठाया है।
इंस्पेक्टर ने दी सफाई
सस्पेंड किए गए इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि जिस दिन गलत गेट पास काटे गए, उसी दिन उन्होंने आढ़तियों और अधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी थी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने खुद पत्र लिखकर इन गेट पास को रुकवाने की मांग की थी और जिला स्तर की जांच में इसे तकनीकी खराबी बताया गया था।
FIR भी दर्ज
इस पूरे धान घोटाले में थाना सदर पिहोवा में पहली FIR दर्ज की गई है।
DFSC की जांच में नीमवाला गांव की एक राइस मिल में 24,318.75 क्विंटल धान कम पाया गया, जिसकी कीमत MSP के हिसाब से करीब 5.81 करोड़ रुपए आंकी गई है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
यह मामला हरियाणा की मंडियों में धान खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। तकनीकी गड़बड़ी या जानबूझकर की गई हेराफेरी—इसकी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
फिलहाल विभाग के सख्त एक्शन से साफ है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है।