Haryana News: हरियाणा के फरीदाबाद स्थित नीमका जिला जेल में बंद संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या के मामले में राज्य सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। इस मामले को सुरक्षा में गंभीर लापरवाही मानते हुए डीजीपी (जेल) आलोक मित्तल ने जेल सुपरिंटेंडेंट हरेंद्र को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही डीएसपी (सुरक्षा) सचिन को भी निलंबित किया गया है।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि जांच पूरी होने तक और भी अधिकारियों या कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
चार दिन पहले सिक्योरिटी बैरक में हुई थी हत्या
जेल सूत्रों और पुलिस अधिकारियों के अनुसार, चार दिन पहले तड़के सिक्योरिटी बैरक में अब्दुल रहमान की हत्या की गई थी। उस समय बैरक में कुल तीन बंदी मौजूद थे — एक उत्तर प्रदेश का निवासी अब्दुल रहमान और दो जम्मू-कश्मीर के निवासी अरुण चौधरी उर्फ अबू जट और शोएब रियाज।
बताया गया कि रात करीब 2 से 3 बजे के बीच अरुण चौधरी ने सो रहे अब्दुल रहमान पर नुकीले पत्थर से कई वार किए। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पहले उसने मुंह दबाया और फिर सिर के पीछे के हिस्से पर हमला किया। शोर सुनकर तीसरा बंदी जाग गया और सुरक्षाकर्मियों को सूचना दी, लेकिन अस्पताल पहुंचने तक अब्दुल की मौत हो चुकी थी।
राम मंदिर को लेकर विवाद की बात सामने आई
जेल सूत्रों के अनुसार, पिछले लगभग 10 दिनों से अब्दुल रहमान और अरुण चौधरी के बीच राम मंदिर को लेकर बहस और विवाद चल रहा था। हालांकि, पुलिस और जेल प्रशासन ने आधिकारिक रूप से इस विवाद को हत्या का एकमात्र कारण नहीं माना है। मामले की जांच अभी जारी है।
सुरक्षा में चूक: पहले वार्डर हटाए गए, अब वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई
हत्या के दो दिन बाद ही संबंधित वार्डर और हेड वार्डर को हटा दिया गया था। अब मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल सुपरिंटेंडेंट और डीएसपी सुरक्षा को भी सस्पेंड कर दिया गया है।
हरेंद्र की जगह नारनौल जेल सुपरिंटेंडेंट संजय बांगर को नीमका जेल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। साथ ही जेल की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी गई है।
कौन था अब्दुल रहमान?
अब्दुल रहमान उत्तर प्रदेश के मिल्कीपुर का रहने वाला था। वह सीमित शिक्षा प्राप्त था और ई-रिक्शा चलाता था। जांच एजेंसियों के अनुसार, मार्च 2025 में उसे फरीदाबाद के पाली क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था।
गुजरात ATS और केंद्रीय एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई में उसे पकड़ा था। उसके पास से दो जिंदा हैंड ग्रेनेड और कुछ डिजिटल सामग्री बरामद हुई थी। जांच में सामने आया था कि उसका संपर्क अल-कायदा इन इंडियन सब-कांटिनेंट (AQIS) से जुड़े एक संदिग्ध आतंकी अबू सूफियान से था।
एजेंसियों के अनुसार, वह अयोध्या में राम मंदिर पर हमले की साजिश से जुड़ा हुआ था। हालांकि, यह मामला अदालत में विचाराधीन था और आरोप सिद्ध नहीं हुए थे।
सोशल मीडिया और डार्क वेब कनेक्शन
जांच एजेंसियों ने बताया था कि जनवरी 2024 में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद कुछ भड़काऊ वीडियो और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियां ट्रैक की गई थीं। IP ट्रेसिंग के दौरान लोकेशन फरीदाबाद से जुड़ी पाई गई।
इसके बाद केंद्रीय एजेंसियों और हरियाणा STF की संयुक्त कार्रवाई में अब्दुल को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में कथित तौर पर ऑनलाइन कट्टरपंथी संपर्क और डिजिटल प्रशिक्षण के संकेत मिले थे।
हत्या का आरोपी: अरुण चौधरी का आपराधिक इतिहास
अब्दुल रहमान की हत्या के आरोप में अरुण चौधरी उर्फ अबू जट को गिरफ्तार किया गया है। वह जम्मू जिले के आरएस पुरा क्षेत्र का निवासी है।
उसका नाम जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में हुए चर्चित अक्षय शर्मा हत्याकांड में भी सामने आया था। उस मामले में गैंगवार और सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीमिंग जैसे गंभीर आरोप लगे थे।
गिरफ्तारी के बाद उसे कठुआ जेल भेजा गया था। बाद में जेल प्रशासन पर सुविधाएं उपलब्ध कराने के आरोप लगाने के बाद उसे अक्टूबर 2024 में फरीदाबाद की नीमका जेल में शिफ्ट किया गया था।
सोशल मीडिया पर गैंग का समर्थन
अब्दुल रहमान की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर कुछ आपराधिक गिरोहों से जुड़े व्यक्तियों द्वारा अरुण चौधरी के समर्थन में पोस्ट किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस इन पोस्ट्स की सत्यता और कानूनी पहलुओं की जांच कर रही है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून को हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती और मामले में विधिक प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने जेल प्रशासन की सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। तीन उच्च-सुरक्षा कैदियों को एक ही बैरक में रखने का निर्णय, संभावित विवाद की जानकारी होने के बावजूद निगरानी में कमी, और हथियार के रूप में उपयोग किए गए पत्थर की उपलब्धता — ये सभी जांच के दायरे में हैं।
राज्य सरकार ने कहा है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।
आगे क्या?
मामले की मजिस्ट्रियल जांच जारी है। फॉरेंसिक रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है। जेल सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव की भी संभावना जताई जा रही है।
प्रशासन ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में और अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
नीमका जेल में हुई यह हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि जेल सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा भी बन गई है। संदिग्ध आतंकी की हिरासत में हत्या ने कई स्तरों पर प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।
