kurukshetra saharanpur state highway : हरियाणा के यमुनानगर में मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले किसानों ने टूटी हुई सड़क की समस्या को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने कुरुक्षेत्र-सहारनपुर स्टेट हाईवे को जाम कर दिया, जिससे करीब ढाई घंटे तक यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और रोडवेज की करीब छह बसें भी जाम में फंसी रहीं।
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान सड़क की खराब हालत को लेकर अपनी मांगों पर अड़े रहे।
सड़क की खराब हालत से नाराज किसान
किसानों का कहना था कि कुरुक्षेत्र-सहारनपुर हाईवे लंबे समय से टूटा हुआ है और जगह-जगह गहरे गड्ढे बने हुए हैं। इससे आए दिन हादसों का खतरा बना रहता है और राहगीरों व वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
किसानों का आरोप था कि कई बार अधिकारियों को शिकायत दी गई और सड़क की मरम्मत का आश्वासन भी मिला, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। इसी से नाराज होकर किसानों ने प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।
सड़क पर बैठकर किया धरना, लंगर भी लगाया
किसानों ने दोपहर करीब 12 बजे हाईवे पर जाम लगाया और सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने वहीं लंगर भी किया। जाम के कारण हाईवे पर ट्रकों, बसों और अन्य वाहनों की लंबी कतार लग गई, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
प्रशासन और पुलिस पहुंची मौके पर
जाम की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और किसानों से बातचीत शुरू की। कुछ देर बाद एसडीएम विश्वनाथ और डीएसपी आशीष चौधरी भी मौके पर पहुंचे और किसान नेताओं से वार्ता की।
अधिकारियों ने किसानों को समझाने की कोशिश की और सड़क की मरम्मत का भरोसा दिलाया, लेकिन किसान ठोस आश्वासन की मांग करते रहे।
एक्सईएन को मौके पर बुलाया गया
किसानों के विरोध को देखते हुए एसडीएम ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के एक्सईएन को मौके पर बुलाया। एक्सईएन से चर्चा के बाद अधिकारियों ने किसानों को बताया कि सड़क की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है और शेष हिस्से को भी जल्द ठीक कर दिया जाएगा।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि सड़क का बेस पूरी तरह खराब हो चुका है, इसलिए इसकी मजबूत मरम्मत के लिए करीब 38 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया है। योजना के अनुसार दामला के पास सड़क के एक हिस्से को सीसी (कंक्रीट) से बनाया जाएगा, ताकि सड़क अधिक समय तक टिकाऊ रहे।
किसानों ने डीसी को मौके पर बुलाने की मांग की
किसान शुरू में प्रशासन के आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि जब तक जिला उपायुक्त (डीसी) मौके पर आकर आश्वासन नहीं देंगी, तब तक वे जाम नहीं खोलेंगे।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि कई बार अधिकारियों से मिलने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। किसानों का कहना था कि पहले जब पार्थ गुप्ता डीसी थे, तब उनकी समस्याएं सुनी जाती थीं, लेकिन अब उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
किसान नेता ने लगाए आरोप
किसान नेता सुभाष गुर्जर ने आरोप लगाया कि पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों की ओर से बार-बार झूठे आश्वासन दिए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार एक्सईएन से मुलाकात हुई और हर बार जल्द मरम्मत का भरोसा दिया गया, लेकिन सड़क की हालत जस की तस बनी रही।
किसानों का कहना था कि जब तक सड़क पूरी तरह दुरुस्त नहीं होती, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।
28 फरवरी तक सड़क गड्ढा-मुक्त करने का आश्वासन
काफी देर तक चली बातचीत के बाद एसडीएम विश्वनाथ ने किसानों को आश्वासन दिया कि 28 फरवरी तक सड़क को गड्ढा-मुक्त कर दिया जाएगा और मरम्मत का कार्य तेजी से पूरा कराया जाएगा।
इस आश्वासन के बाद किसान जाम खोलने के लिए राजी हो गए और करीब ढाई घंटे बाद यातायात फिर से सामान्य हो सका।
किसानों ने दी चेतावनी
किसानों ने प्रशासन को चेतावनी भी दी है कि यदि 28 फरवरी के बाद भी सड़क पर गड्ढे पाए गए तो वे एसडीएम कार्यालय का घेराव करेंगे और बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
किसानों का कहना है कि खराब सड़कों के कारण न केवल आम लोगों को परेशानी होती है, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए प्रशासन को इस समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए।
आम लोगों को हुई परेशानी
हाईवे जाम के कारण यात्रियों, बस चालकों और ट्रक ड्राइवरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे। रोडवेज बसों में सफर कर रहे यात्रियों को भी देरी का सामना करना पड़ा।
हालांकि जाम खुलने के बाद यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो गया, लेकिन इस घटना ने सड़क की खराब हालत और प्रशासनिक लापरवाही के मुद्दे को फिर से उजागर कर दिया है।