Assistant Professor Suspended: हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के दो असिस्टेंट प्रोफेसर सस्पेंड, जानें पूरा मामला

एचएयू में यौन उत्पीड़न का मामला, दो असिस्टेंट प्रोफेसर सस्पेंड

Assistant Professor Suspended: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में पीएचडी छात्रा से कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बायोटेक्नोलॉजी विभाग के दो असिस्टेंट प्रोफेसरों को वीरवार को सस्पेंड कर दिया है। आरोप है कि दोनों प्रोफेसरों ने पीएचडी कर रही छात्रा के साथ अनुचित व्यवहार किया।

पीड़ित छात्रा ने इस संबंध में कॉलेज के डीन को लिखित शिकायत सौंपी थी। शिकायत में छात्रा ने अपने साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का विस्तार से उल्लेख किया था। शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की।

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सस्पेंड किए गए प्रोफेसरों के नाम

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बायोटेक्नोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अजीव सांगवान और नवीन कौशिक को निलंबित कर दिया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए दोनों वैज्ञानिकों को सस्पेंड किया गया है, ताकि जांच प्रक्रिया किसी दबाव या प्रभाव से मुक्त रह सके।

जांच के लिए गठित हुई समिति

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए एक जांच समिति का गठन कर दिया है। प्रशासन के अनुसार, जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों असिस्टेंट प्रोफेसर निलंबन अवधि में विश्वविद्यालय की किसी भी शैक्षणिक या प्रशासनिक गतिविधि में शामिल नहीं रहेंगे।

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इन बिंदुओं पर होगी जांच

यूनिवर्सिटी द्वारा गठित जांच समिति कई अहम बिंदुओं पर जांच करेगी। इसमें यह भी शामिल है कि शिकायत में बताए गए समय और स्थान पर आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी छात्रा वहां मौजूद थे या नहीं। इसके लिए सीसीटीवी फुटेज, अटेंडेंस रजिस्टर और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाएगी।

इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि क्या प्रोफेसरों ने छात्रा के रिसर्च कार्य या पीएचडी थीसिस को लेकर उसे डराने या मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की थी। जांच समिति यह भी पता लगाएगी कि क्या आरोपियों के खिलाफ पहले भी किसी अन्य छात्र या छात्रा द्वारा मौखिक या लिखित शिकायत दी गई थी।

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डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों से पूछताछ

जांच के दौरान यह भी जांचा जाएगा कि क्या दोनों पक्षों के बीच व्हाट्सएप, ईमेल या कॉल के माध्यम से कोई ऐसी बातचीत हुई है जो उत्पीड़न की श्रेणी में आती हो। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या प्रोफेसरों ने अपनी शैक्षणिक स्थिति का दुरुपयोग करते हुए छात्रा को अनुचित लाभ देने या नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी।

विभाग के अन्य छात्रों, लैब सहायकों और सहकर्मियों से भी पूछताछ की जाएगी कि क्या उन्होंने कभी छात्रा के साथ किसी प्रकार का दुर्व्यवहार होते देखा या सुना था।

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विश्वविद्यालय का बयान

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की गई है और जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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