Khejri Bachao Andolan: खेजड़ी बचाओ आंदोलन के तहत सोमवार को बीकानेर बंद रखा गया है। पर्यावरण संरक्षण के इस आंदोलन को व्यापारिक संगठनों का समर्थन मिला है। वहीं शहरी क्षेत्र के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में लंच टाइम के बाद आधे दिन की छुट्टी घोषित की गई है। बंद और आंदोलन को देखते हुए शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
आंदोलन के तहत दोपहर बाद कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद शाम को बिश्नोई धर्मशाला के पास सभा आयोजित होगी। आंदोलन में शामिल होने के लिए बीकानेर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शहर पहुंच रहे हैं।
खेजड़ी कटाई के विरोध में धरना
बीकानेर सहित पश्चिमी राजस्थान में सोलर कंपनियों द्वारा नए प्रोजेक्ट लगाने के दौरान बड़े पैमाने पर खेजड़ी के पेड़ों की कटाई किए जाने का आरोप है। आंदोलनकारियों का कहना है कि सोलर प्रोजेक्ट के लिए कई बीघा जमीन को पूरी तरह साफ किया जा रहा है। आरोप है कि कंपनियां रात के समय खेजड़ी के पेड़ों को काटकर उन्हें जमीन में दबा देती हैं।

खेजड़ी बचाओ आंदोलन के तहत कलेक्ट्रेट और करणीसर भाटियान में पर्यावरण प्रेमी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। इससे पहले बिश्नोई समाज के मुकाम में हुई एक बड़ी बैठक में आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया गया था।
गांवों से बीकानेर पहुंच रहे लोग
बीकानेर के आसपास के गांवों से लोग सुबह से ही अलग-अलग वाहनों से शहर के लिए रवाना हो गए। पूगल, खाजूवाला, छतरगढ़, नाल, कोलायत, बज्जू और नोखा सहित कई छोटे-बड़े गांवों से आंदोलनकारी बीकानेर पहुंच रहे हैं।

सौ से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात
शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कोटगेट क्षेत्र में सबसे अधिक पुलिस बल तैनात किया गया है, जहां प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा जस्सूसर गेट, रेलवे स्टेशन रोड सहित अन्य प्रमुख स्थानों पर भी अतिरिक्त पुलिस जाब्ता लगाया गया है।
पॉलिटेक्निक कॉलेज में जुटेंगे आंदोलनकारी
आंदोलनकारी सुबह 11 बजे से पॉलिटेक्निक कॉलेज में एकत्र होना शुरू करेंगे। इसके बाद बिश्नोई धर्मशाला के पास विरोध प्रदर्शन करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे, जहां अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
वाहनों के रूट और पार्किंग व्यवस्था
प्रशासन की ओर से आंदोलन को देखते हुए वाहनों के रूट और पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है। श्रीडूंगरगढ़ रोड, जयपुर रोड, श्रीगंगानगर रोड, जैसलमेर, खाजूवाला, कोलायत, नोखा, नागौर और जोधपुर सहित विभिन्न दिशाओं से आने वाले वाहनों को अलग-अलग मार्गों से पॉलिटेक्निक कॉलेज और डूंगर कॉलेज में पार्क कराया जाएगा।
व्यापार मंडल का समर्थन
बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल ने बंद को समर्थन देने की घोषणा की है। मंडल अध्यक्ष जुगल राठी और सचिव संजय सांड ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के समर्थन में सभी बाजार दोपहर 2 बजे तक बंद रखे जाएंगे, इसके बाद बाजार सामान्य रूप से खोले जाएंगे।

शहरी स्कूलों में आधे दिन की छुट्टी
जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) ने आदेश जारी कर शहरी क्षेत्र के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में लंच टाइम के बाद छुट्टी घोषित की है। यह आदेश रविवार रात करीब साढ़े दस बजे जारी किया गया। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में छुट्टी की घोषणा नहीं की गई है। बता दें सोलर कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर खेजड़ी के पेड़ों की कटाई को लेकर खेजड़ी बचाओ आंदोलन लंबे समय से चल रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि बार-बार शिकायतों और धरना-प्रदर्शन के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, इसी वजह से उन्हें बीकानेर बंद का आह्वान करना पड़ा।
इससे पहले भी बिश्नोई समाज और अन्य सामाजिक संगठनों ने खेजड़ी संरक्षण को लेकर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी थी। बंद और प्रदर्शन को देखते हुए शहर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके और आमजन को परेशानी न हो।
🌳 आखिर क्या है खेजड़ी का पेड़?
खेजड़ी (Khejri) एक अत्यंत महत्वपूर्ण रेगिस्तानी वृक्ष है, जिसे राजस्थान का राज्य वृक्ष माना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Prosopis cineraria है। यह पेड़ शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में भी आसानी से पनपता है और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
🔹 खेजड़ी का महत्व क्यों है खास?
1. पर्यावरण का रक्षक
खेजड़ी पेड़ रेगिस्तान में हरियाली बनाए रखने, मिट्टी के कटाव को रोकने और भूजल संरक्षण में मदद करता है। यह पेड़ लंबे समय तक बिना पानी के जीवित रह सकता है।
2. किसानों के लिए वरदान
खेजड़ी की जड़ें मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाती हैं, जिससे खेतों की उर्वरता बनी रहती है। किसान इसे खेतों में खड़ा रखते हैं क्योंकि यह फसलों को नुकसान नहीं पहुंचाता।
3. पशुओं का सहारा
खेजड़ी की पत्तियां (लूंग) और फल (सांगरी) पशुओं के चारे के रूप में उपयोग होते हैं। सूखे समय में यह पशुपालकों के लिए जीवनरेखा साबित होता है।
4. भोजन और आजीविका
खेजड़ी की फलियाँ सांगरी राजस्थान के पारंपरिक व्यंजनों का अहम हिस्सा हैं। इससे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है।
5. सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
बिश्नोई समाज खेजड़ी को पवित्र मानता है। 1730 में खेजड़ली कांड में 363 बिश्नोईयों ने खेजड़ी की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे
खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि रेगिस्तान की जीवनरेखा है। यही वजह है कि इसके संरक्षण के लिए खेजड़ी बचाओ आंदोलन तेज़ हो रहा है।
