Karnal mandi scam: हरियाणा के करनाल जिले की अनाज मंडियों में सामने आए धान घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले की जांच कर रही सीआईए-3 टीम ने मंडी सचिवों सहित अधिकारियों को हिरासत में लिया है। गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां से उन्हें रिमांड पर लिया जा सकता है या न्यायिक हिरासत में भेजा जा सकता है।
पुलिस के अनुसार करनाल मंडी की सचिव आशा रानी, जुंडला मंडी के सचिव दीपक कुमार और असंध मंडी के सचिव कृष्ण धनखड़ को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा पहले से गिरफ्तार डीएफएससी अनिल कुमार को प्रोडक्शन वारंट पर हिरासत में लिया गया है।
आज गिरफ्तार आरोपियों की सूची (करनाल धान घोटाला)
- आशा रानी – मंडी सचिव, करनाल मंडी
- दीपक कुमार – मंडी सचिव, जुंडला मंडी
- कृष्ण धनखड़ – मंडी सचिव, असंध मंडी
- अनिल कुमार – डीएफएससी (प्रोडक्शन वारंट पर हिरासत)
7 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच
यह मामला धान की खरीद और भंडारण से जुड़े करीब 7 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़ा है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सरकारी रिकॉर्ड में धान की खरीद और स्टॉक पूरा दिखाया गया था, जबकि कई स्थानों पर वास्तविकता में धान मौजूद ही नहीं था।
फर्जी बिल, खरीद रजिस्टर और स्टॉक एंट्री तैयार कर रिकॉर्ड को सही दिखाया गया और इसी तरीके से करोड़ों रुपये का गबन किया गया।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
इस मामले में पुलिस पहले ही कई अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें फूड सप्लाई विभाग और हैफेड से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। ये सभी फिलहाल जेल में हैं।
धान घोटाले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था, जो 9 जनवरी 2026 से मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज और तकनीकी साक्ष्य सामने आए, जिनके आधार पर आगे की गिरफ्तारियां की गईं।
राइस मिलों में भी मिला फर्जी स्टॉक
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ राइस मिलों में कागजों में धान का स्टॉक दिखाया गया, जबकि मौके पर धान नहीं मिला। अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से यह फर्जी रिकॉर्ड तैयार किया गया था ताकि सरकारी जांच में कोई कमी नजर न आए।
पुलिस का कहना है कि इस फर्जीवाड़े के जरिए लंबे समय तक सरकारी सिस्टम को गुमराह किया गया और सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
पद का दुरुपयोग और मिलीभगत
जांच एजेंसियों के अनुसार इस घोटाले में कई जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया और आपसी मिलीभगत से पूरी साजिश को अंजाम दिया। धान की खरीद, भंडारण और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई।
दस्तावेजी साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर आरोपियों की भूमिका स्पष्ट होने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।
मंडी सचिव पर पहले भी दर्ज हुआ था केस
करनाल मंडी की सचिव आशा रानी के खिलाफ पहले भी फर्जी गेट पास के जरिए धान खरीद दिखाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान उन्हें निलंबित भी किया गया था। हालांकि बाद में हाईकोर्ट से उन्हें गिरफ्तारी पर रोक मिल गई थी।
अब जांच आगे बढ़ने के बाद फिर से कार्रवाई तेज की गई है और कई अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
