Haryana Sarpanch Association: हरियाणवी संगीत जगत के चर्चित गायक मासूम शर्मा और जींद जिले के मुआना गांव के पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा के बीच शुरू हुआ स्टेज विवाद अब व्यक्तिगत टकराव से आगे बढ़कर सामाजिक और राजनीतिक रूप ले चुका है। यह मामला अब “कलाकार बनाम पंचायत” की बहस में तब्दील हो गया है। बयानबाजी, चेतावनियां, सोशल मीडिया पोस्ट और पंचायतों की बैठकों ने इस विवाद को पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना दिया है।
विवाद की शुरुआत: 18 फरवरी का कार्यक्रम
यह पूरा घटनाक्रम 18 फरवरी को जींद में आयोजित एक कार्यक्रम से शुरू हुआ। यह कार्यक्रम मासूम शर्मा के बहनोई धर्मवीर आर्य की 25वीं सालगिरह के अवसर पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान भीड़ बढ़ने लगी और मंच पर कई लोग चढ़ गए। इसी दौरान मासूम शर्मा ने मंच से पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा को नीचे उतरने के लिए कहा।
बताया जाता है कि मंच से उन्होंने कहा—“मेरे प्रोग्राम में कोई सरपंच, एमएलए या मंत्री हो, मैं किसी को नहीं मानता।” इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद विवाद ने तूल पकड़ लिया।
सरपंचों की नाराजगी: ‘सम्मान का सवाल’
वीडियो वायरल होने के बाद विभिन्न जिलों के सरपंचों ने इसे पंचायतों के सम्मान से जोड़ दिया। उनका कहना है कि किसी भी चुने हुए जनप्रतिनिधि का सार्वजनिक रूप से अपमान करना अनुचित है।
झज्जर, जींद और आसपास के जिलों के सरपंचों ने मासूम शर्मा के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई। कई सरपंचों ने चेतावनी दी कि जब तक वह सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तब तक उन्हें गांवों में कार्यक्रम नहीं करने दिया जाएगा।
सरपंच एसोसिएशन के प्रधान रणबीर गिल समैन ने कहा कि पूर्व सरपंच को स्वयं मंच पर नहीं चढ़ा गया था, बल्कि उन्हें बुलाया गया था। उन्होंने कहा, “किसी बुजुर्ग व्यक्ति को इस तरह जलील करना गलत है। पंचायतों का अपना रुतबा होता है और सरपंच गांव का सम्मानित प्रतिनिधि होता है।”
‘70 सरपंच हांडै’ बयान से और भड़का मामला
विवाद बढ़ने के बाद मासूम शर्मा ने सफाई दी, लेकिन उनके बयान ने आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने कहा कि “एक आदमी के कहने से पंचायत नहीं होती। मेरे समर्थन में भी कई सरपंच हैं।” साथ ही उन्होंने “70 सरपंच हांडै” वाली कहावत का जिक्र किया, जिसे सरपंचों ने अपमानजनक माना।
मासूम शर्मा का कहना है कि यह हरियाणा की एक कहावत है—“तेरे बरगै 70 हांडै, तेरे बरगै 150 फिरै”—जिसे गलत अर्थ में लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री और एमएलए वाली बात पर वह आज भी कायम हैं।
इस बयान के बाद सरपंचों की नाराजगी और बढ़ गई।
पूर्व सरपंच की प्रतिक्रिया: ‘अब एसोसिएशन जवाब देगी’
मुआना गांव के पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा ने कहा कि उन्होंने मासूम शर्मा का बयान देखा है। उनके अनुसार, “वह ऐसे ही कुछ भी बोल देता है। उस दिन फोन पर कुछ और कह रहा था और बाद में जींद के कार्यक्रम में आ गया। अब इसका जवाब हरियाणा सरपंच एसोसिएशन देगी।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं और यदि माफी नहीं मांगी गई तो महापंचायत बुलाई जाएगी।
म्यूजिक इंडस्ट्री में भी बंटे कलाकार
इस विवाद का असर हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री में भी दिखाई दे रहा है। कलाकार दो गुटों में बंटते नजर आ रहे हैं। एक ओर सीएम के ओएसडी और कलाकार गजेंद्र फोगाट तथा सिंगर राहुल पुट्ठी ने मासूम शर्मा के खिलाफ बयान दिया है। वहीं सिंगर और राइटर हैरी लाठर ने सोशल मीडिया पर मासूम के समर्थन में पोस्ट साझा की।
मासूम शर्मा के भाई विकास शर्मा पहले ही सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं, लेकिन स्वयं मासूम ने अब तक स्पष्ट माफी नहीं दी है।
गन कल्चर और अश्लीलता पर बहस
रणबीर गिल ने इस विवाद को व्यापक सामाजिक संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि सरकार को ऐसे गानों पर रोक लगानी चाहिए जिनमें गन कल्चर और अभद्र भाषा को बढ़ावा दिया जाता है। उनका कहना है कि ऐसे गीत बच्चों और युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
उन्होंने कहा, “अगर मासूम शर्मा ने माफी नहीं मांगी तो पंचायतें उनके गानों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाएंगी और गांवों में उनके कार्यक्रमों पर रोक लगाएंगी।”
यह बयान विवाद को केवल व्यक्तिगत टकराव से हटाकर सांस्कृतिक और सामाजिक बहस में बदल देता है।
राजनीतिक रंग लेने लगा मामला
विवाद अब सामाजिक दायरे से निकलकर राजनीतिक विमर्श में भी प्रवेश कर चुका है। पंचायतें स्थानीय सत्ता संरचना का अहम हिस्सा होती हैं, और सरपंचों की सामूहिक नाराजगी किसी भी कलाकार के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकती है।
दूसरी ओर, कलाकारों का तर्क है कि मंच पर अनुशासन बनाए रखना कलाकार का अधिकार है। यदि मंच पर भीड़ बढ़ जाती है, तो कार्यक्रम बाधित होता है और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
इस पूरे विवाद ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या कलाकारों को सार्वजनिक कार्यक्रमों में पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिए या स्थानीय सामाजिक संरचनाओं का सम्मान प्राथमिक होना चाहिए?
सोशल मीडिया पर तीखी बहस
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह मुद्दा लगातार ट्रेंड कर रहा है। एक वर्ग मासूम शर्मा के समर्थन में यह कह रहा है कि उन्होंने केवल कार्यक्रम की व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। वहीं दूसरा वर्ग इसे अहंकार और जनप्रतिनिधियों के अपमान के रूप में देख रहा है।
वीडियो क्लिप्स, बयान और पोस्ट लगातार शेयर किए जा रहे हैं, जिससे विवाद थमने के बजाय और फैलता जा रहा है।
आगे क्या?
फिलहाल मामला हरियाणा सरपंच एसोसिएशन के स्तर तक पहुंच चुका है। यदि पंचायतों ने सामूहिक रूप से उनके कार्यक्रमों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया, तो यह मासूम शर्मा के करियर पर असर डाल सकता है।
दूसरी ओर, यदि कोई मध्यस्थता या सार्वजनिक माफी का रास्ता निकाला जाता है, तो विवाद शांत हो सकता है। लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए तत्काल समाधान के आसार कम नजर आ रहे हैं।
निष्कर्ष
मासूम शर्मा और पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा के बीच शुरू हुआ यह विवाद अब व्यक्तिगत टकराव से कहीं आगे बढ़ चुका है। यह मुद्दा सम्मान, सामाजिक संरचना, कलाकार की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक जिम्मेदारी जैसे कई पहलुओं को छू रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह विवाद सुलह की दिशा में बढ़ता है या फिर यह हरियाणा की राजनीति और सांस्कृतिक जगत में लंबी खींचतान का कारण बनता है।
