Haryana Assembly: हरियाणा में अनियोजित शहरीकरण और अवैध कॉलोनियों के बढ़ते जाल पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के 12 प्रमुख शहरों में नए सेक्टर विकसित किए जाएंगे। इसके लिए करीब 40 हजार एकड़ जमीन की व्यवस्था की गई है। सरकार का दावा है कि यह कदम न केवल अवैध निर्माण पर लगाम लगाएगा, बल्कि आम लोगों को सस्ती दरों पर प्लॉट उपलब्ध कराने में भी मददगार साबित होगा।
पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश के कई शहरों में अवैध कॉलोनियां तेजी से बसी हैं। इनमें बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहता है, जिससे बाद में सरकार पर इन्हें नियमित करने और सुविधाएं उपलब्ध कराने का दबाव बढ़ता है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब योजनाबद्ध विकास मॉडल अपनाया जा रहा है।
40 हजार एकड़ जमीन का किया गया इंतजाम
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नए सेक्टरों के विकास के लिए लगभग 40 हजार एकड़ जमीन चिह्नित की जा चुकी है। यह जमीन विभिन्न जिलों में चरणबद्ध तरीके से अधिग्रहित या व्यवस्थित की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि इन सेक्टरों में आधुनिक शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें चौड़ी सड़कें, सीवरेज सिस्टम, पेयजल आपूर्ति, बिजली नेटवर्क, हरित क्षेत्र, सामुदायिक केंद्र और व्यावसायिक परिसर शामिल होंगे।
सरकार का उद्देश्य है कि लोग अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने की बजाय अधिकृत सेक्टरों में निवेश करें, जहां कानूनी सुरक्षा और बेहतर बुनियादी ढांचा उपलब्ध हो।
किन शहरों को मिलेगा फायदा
जिन 12 शहरों में नए सेक्टर विकसित किए जाने की योजना है, उनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, हिसार, रोहतक समेत कई उभरते शहरी क्षेत्र शामिल हैं।
इन शहरों में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते आवासीय जरूरतों में भी इजाफा हुआ है। खासकर एनसीआर से जुड़े क्षेत्रों में प्लॉट और मकानों की मांग लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर योजनाबद्ध तरीके से सेक्टर विकसित किए गए तो इससे रियल एस्टेट बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध कॉलोनियों की प्रवृत्ति कम होगी।
अब अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई
राज्य सरकार पहले ही करीब 900 अनियमित कॉलोनियों को नियमित कर चुकी है। हालांकि सरकार का मानना है कि बार-बार नियमितीकरण की नीति से अवैध निर्माण को अप्रत्यक्ष बढ़ावा मिलता है।
अब नई रणनीति के तहत अवैध कॉलोनी काटने वालों और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध निर्माण की शुरुआती अवस्था में ही कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में बिना मंजूरी के किसी भी कॉलोनी को विकसित न होने दिया जाए।
प्रदेश को पांच जोन में बांटकर होगी प्लानिंग
बेहतर निगरानी और संतुलित विकास के लिए हरियाणा को पांच जोन में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जोन में शहरों की जरूरत, जनसंख्या घनत्व और विकास संभावनाओं के आधार पर नए सेक्टर विकसित किए जाएंगे।
इस जोनल प्लानिंग का उद्देश्य यह है कि विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि छोटे और मध्यम शहरों को भी समान अवसर मिले। इससे क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
आम लोगों को क्या होगा लाभ
सरकार का दावा है कि इस योजना से मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को राहत मिलेगी। अधिकृत सेक्टरों में पारदर्शी प्रक्रिया के तहत प्लॉट आवंटन किया जाएगा।
यदि समय पर बुनियादी सुविधाएं विकसित कर दी गईं, तो लोगों को निजी डेवलपर्स या अवैध कॉलोनियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही संपत्ति की कानूनी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, योजनाबद्ध विकास से संपत्ति के मूल्य में स्थिरता आएगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
जल्द हो सकती है विस्तृत घोषणा
सूत्रों के मुताबिक, सरकार जल्द ही इस योजना की विस्तृत घोषणा कर सकती है। इसमें प्लॉट की दरें, आवेदन प्रक्रिया, आरक्षण नीति और विकास की समयसीमा जैसी जानकारी साझा की जाएगी।
यदि यह योजना तय समयसीमा में लागू होती है, तो हरियाणा में शहरी विकास को नई दिशा मिल सकती है। साथ ही अवैध कॉलोनियों की समस्या पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
हरियाणा सरकार की यह पहल प्रदेश में सुव्यवस्थित और संतुलित शहरीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। आने वाले महीनों में इसकी प्रगति पर सभी की नजरें रहेंगी।
