Govt School Update: हरियाणा सरकार ने सरकारी स्कूलों के संचालन और रखरखाव को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य के सरकारी स्कूलों में छोटे-मोटे मरम्मत कार्यों के लिए मुख्यालय से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इस फैसले से स्कूल प्रबंधन को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
स्कूल मुखियाओं को मिली नई जिम्मेदारी
नई व्यवस्था के तहत अब स्कूलों के मुखिया अपने स्तर पर ही मरम्मत और आवश्यक कार्य करा सकेंगे। इसके लिए उन्हें सालाना 5 लाख रुपये तक खर्च करने की अनुमति दी गई है। इससे पहले ऐसे कार्यों के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जिससे काम में देरी होती थी।
किन-किन कार्यों की होगी अनुमति
इस फैसले के बाद स्कूलों में निम्न कार्य आसानी से कराए जा सकेंगे:
- साफ-सफाई और रखरखाव
- पेयजल व्यवस्था
- शौचालय निर्माण व मरम्मत
- दीवारों और भवन की मरम्मत
- तारबंदी और अन्य जरूरी सुधार कार्य
चाइल्ड वेलफेयर फंड से होगा खर्च
मरम्मत और अन्य कार्यों का खर्च चाइल्ड वेलफेयर फंड से किया जाएगा। यदि किसी स्कूल में इस फंड में पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा जा सकेगा।
लोकल स्तर पर होगी निगरानी
स्कूलों में मरम्मत कार्यों को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए लोकल परचेज कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी कोटेशन के आधार पर कार्य आवंटित करेगी और उसकी निगरानी भी करेगी।
शिक्षा व्यवस्था में होगा सुधार
सरकार के इस फैसले से स्कूलों में लंबे समय से लंबित छोटे-छोटे कार्य अब तेजी से पूरे हो सकेंगे। इससे छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्कूलों का वातावरण भी सुधरेगा।
हरियाणा सरकार का यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा।