Delhi Panipat Karnal RRTS: करनाल वासियों के लिए खुशखबरी, दिल्ली–पानीपत–करनाल नमो भारत कॉरिडोर पर आई बड़ी अपडेट

rail corridor

Delhi Panipat Karnal RRTS: दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक नमो भारत रैपिड रेल के सफल संचालन के बाद अब केंद्र सरकार की निगाहें दिल्ली–पानीपत–करनाल कॉरिडोर पर टिक गई हैं। यह प्रस्तावित रैपिड रीजनल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) न सिर्फ दिल्ली एनसीआर की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा, बल्कि राजधानी पर बढ़ते आवासीय और ट्रैफिक दबाव को भी कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। करीब 136.3 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दिल्ली को हरियाणा के प्रमुख औद्योगिक और ऐतिहासिक शहरों—सोनीपत, पानीपत और करनाल—से हाईस्पीड नेटवर्क के जरिए जोड़ेगा।

सराय काले खां से करनाल तक सीधी रफ्तार

प्रस्तावित रूट दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर इंद्रप्रस्थ, कश्मीरी गेट, बुराड़ी, मुकुंदपुर और नरेला होते हुए हरियाणा में प्रवेश करेगा। इसके बाद कुंडली, सोनीपत, मुरथल, गन्नौर, समालखा, पानीपत और करनाल (मधुबन बाईपास) तक इसका विस्तार होगा। पूरा कॉरिडोर नेशनल हाईवे-44 (दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे) के समानांतर विकसित किया जाएगा, जिससे निर्माण और भविष्य के विस्तार में सुविधा होगी।

इस प्रोजेक्ट को लागू करने की जिम्मेदारी National Capital Region Transport Corporation (NCRTC) के पास है, जिसने पहले ही दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को जमीन पर उतारा है। दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर को भी उसी तकनीकी मॉडल पर विकसित किया जाएगा—जहां ट्रेनें 160 किमी प्रति घंटा की डिजाइन स्पीड और लगभग 100–120 किमी प्रति घंटा की औसत परिचालन गति से चल सकेंगी।

136.3 किमी लंबा हाई-स्पीड कॉरिडोर

यह नया कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर हरियाणा में करनाल (मधुबन-करनाल बाईपास) तक लगभग 136.3 किलोमीटर की दूरी को हाई-स्पीड रेल से जोड़ेगा। यह नेशनल हाईवे-44 के समानांतर ट्रैक पर बिछाया जाएगा, जिससे दिल्ली, सोनीपत, पानीपत और करनाल जैसे प्रमुख शहरों में गहन कनेक्टिविटी आएगी।

कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित

📍 दिल्ली सेक्शन (5 स्टेशन)

  • सराय काले खां
  • इंद्रप्रस्थ
  • कश्मीरी गेट
  • बुराड़ी
  • मुकुंदपुर
  • नरेला (कुल 5)

📍 हरियाणा सेक्शन (7 स्टेशन)

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  • कुंडली
  • सोनीपत
  • समालखा
  • मुरथल
  • गन्नौर
  • पानीपत
  • करनाल (मधुबन-करनाल बाईपास)

इन सभी स्टेशनों के माध्यम से NCR के दिलों को जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प मिलेगा

सफर होगा आधा, समय की बड़ी बचत

इस कॉरिडोर के बन जाने के बाद दिल्ली से पानीपत की दूरी लगभग 60 मिनट में तय हो सकेगी। फिलहाल ट्रैफिक के कारण यही सफर 2 से 2.5 घंटे ले लेता है। वहीं, दिल्ली से करनाल पहुंचने में अभी 3.5 से 4 घंटे तक लग जाते हैं, जो रैपिड रेल के बाद घटकर करीब डेढ़ घंटे रह जाएंगे।

यह समय बचत सिर्फ यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं होगी, बल्कि रोजाना कामकाज के लिए दिल्ली आने-जाने वाले हजारों लोगों के जीवन स्तर पर सीधा असर डालेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी मिलने के बाद लोग दिल्ली में महंगे किराए पर रहने के बजाय सोनीपत, पानीपत या करनाल जैसे शहरों में बसना पसंद करेंगे और डेली अप-डाउन करेंगे।

लागत और फंडिंग का मॉडल

दिल्ली-पानीपत-करनाल RRTS कॉरिडोर की अनुमानित लागत लगभग 35 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है। नवंबर 2025 में केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग को मंजूरी दी थी। फंडिंग मॉडल में केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार की साझेदारी होगी। इसके अलावा एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) और जापान डेवलपमेंट बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं की भागीदारी की संभावना भी जताई जा रही है।

हालांकि, शुरुआती दौर में लागत साझा करने को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच चर्चा लंबी चली। दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर में जहां उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र के बीच तालमेल अपेक्षाकृत तेज था, वहीं इस प्रोजेक्ट में दिल्ली सरकार की ओर से शुरुआती झिझक ने प्रक्रिया को धीमा किया।

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स्टेशन चयन और एलाइनमेंट में बदलाव

इस कॉरिडोर में देरी का एक बड़ा कारण रूट एलाइनमेंट और स्टेशन चयन में बदलाव रहा। शुरुआती प्रस्ताव में रूट कश्मीरी गेट से शुरू होना था, लेकिन बाद में इसे सराय काले खां तक विस्तारित करने का निर्णय लिया गया ताकि यह दिल्ली-मेरठ RRTS और अन्य ट्रांजिट सिस्टम से बेहतर तरीके से जुड़ सके।

नरेला और कुंडली के आसपास स्टेशनों की स्थिति को लेकर कई बार सर्वे बदले गए। स्थानीय आबादी, भूमि अधिग्रहण और भविष्य के शहरी विस्तार को ध्यान में रखते हुए एलाइनमेंट में संशोधन किए गए। इन प्रक्रियाओं में समय लगा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण से यह बदलाव फायदेमंद साबित होंगे।

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NH-44 चौड़ीकरण और समन्वय

चूंकि यह कॉरिडोर NH-44 के समानांतर विकसित किया जाएगा, इसलिए नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण कार्य के साथ तालमेल जरूरी था। दिल्ली से पानीपत के बीच हाईवे को 8 से 12 लेन तक विस्तारित करने का काम चल रहा था। इस दौरान National Highways Authority of India (NHAI) और NCRTC के बीच समन्वय स्थापित किया गया, ताकि दोनों प्रोजेक्ट्स एक-दूसरे के काम में बाधा न बनें।

अब हाईवे का अधिकांश काम पूरा हो चुका है, जिससे रैपिड रेल के पिलर खड़े करने और ट्रैक बिछाने का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, जून–जुलाई 2026 से जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू हो सकता है।

औद्योगिक और आर्थिक प्रभाव

सोनीपत, पानीपत और करनाल हरियाणा के महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र हैं। पानीपत टेक्सटाइल और हैंडलूम उद्योग के लिए प्रसिद्ध है, जबकि सोनीपत में कई औद्योगिक और शैक्षणिक संस्थान विकसित हो रहे हैं। करनाल कृषि अनुसंधान और व्यापार का प्रमुख केंद्र है।

बेहतर कनेक्टिविटी मिलने के बाद इन शहरों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। उद्योगों को कुशल मानव संसाधन आसानी से उपलब्ध होगा और दिल्ली के व्यावसायिक नेटवर्क से सीधा जुड़ाव मजबूत होगा। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बड़ा प्रोत्साहन मिल सकता है।

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रियल एस्टेट क्षेत्र में भी तेजी आने की संभावना है। पहले दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के आसपास संपत्तियों की कीमतों में वृद्धि देखी गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर के आसपास भी आवासीय और वाणिज्यिक परियोजनाओं में तेजी आ सकती है।

पर्यावरणीय और सामाजिक लाभ

रैपिड रेल जैसी सार्वजनिक परिवहन प्रणाली निजी वाहनों पर निर्भरता कम करती है। इससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में कमी आती है। दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या है, ऐसे में हाईस्पीड, इलेक्ट्रिक आधारित पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर्यावरण के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

साथ ही, बेहतर कनेक्टिविटी से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। छोटे शहरों के छात्र और मरीज दिल्ली के संस्थानों तक कम समय में पहुंच सकेंगे।

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दिल्ली पर दबाव होगा कम

दिल्ली में लगातार बढ़ती आबादी और महंगे आवासीय किराए बड़ी समस्या बन चुके हैं। यदि दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर समय पर पूरा होता है, तो राजधानी में बसने का दबाव कम हो सकता है। लोग आसपास के शहरों में रहकर भी दिल्ली में काम कर सकेंगे।

शहरी योजनाकारों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट “डिसेंट्रलाइजेशन” की दिशा में अहम कदम साबित होगा—जहां विकास केवल दिल्ली तक सीमित न रहकर पूरे एनसीआर में समान रूप से फैले।

नवंबर 2025 में केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निर्माण कार्य तय समयसीमा में शुरू और पूरा हो पाए। NCRTC ने नरेला और सोनीपत के बीच बिजली लाइनों और अन्य अवरोध हटाने के लिए टेंडर जारी कर दिया है, जो निर्माण की दिशा में पहला ठोस कदम है।

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यदि सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली से करनाल तक की दूरी सिर्फ डेढ़ घंटे की रह जाएगी। यह कॉरिडोर न केवल उत्तर हरियाणा बल्कि पूरे एनसीआर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।

दिल्ली-मेरठ नमो भारत की सफलता के बाद अब उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं। दिल्ली-पानीपत-करनाल रैपिड रेल प्रोजेक्ट से क्षेत्रीय विकास की नई कहानी लिखी जा सकती है—जहां तेज रफ्तार सिर्फ ट्रेनों की नहीं, बल्कि विकास की भी होगी।

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