Sunil Sandhu Dismissed: हरियाणा के कैथल में तैनात हेड कॉन्स्टेबल सुनील संधू को पुलिस विभाग ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई विभागीय अनुशासन के उल्लंघन, NDPS एक्ट के तहत रेड में कथित लापरवाही और वरिष्ठ अधिकारी पर सोशल मीडिया के माध्यम से गंभीर आरोप लगाने के बाद की गई। मामले ने न केवल जिले में बल्कि प्रदेश स्तर पर भी चर्चा का विषय बना दिया है।
जिला पुलिस अधीक्षक उपासना सिंह ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुनील संधू ने अपनी शिकायत विभागीय चैनल से उठाने के बजाय फेसबुक पोस्ट के माध्यम से सार्वजनिक की, जिससे पुलिस विभाग की छवि प्रभावित हुई।
16 फरवरी की रेड से शुरू हुआ विवाद
SP के अनुसार, 16 फरवरी को सिटी थाना क्षेत्र में नशा मुक्ति टीम ने एक रेड की थी। सुनील संधू इस टीम का हिस्सा थे। आरोप है कि रेड के दौरान NDPS एक्ट की अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
NDPS एक्ट के तहत तलाशी और बरामदगी की कार्रवाई विशेष नियमों के तहत की जाती है। मौके पर एंट्री दर्ज करना, राजपत्रित अधिकारी की उपस्थिति में तलाशी लेना और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होता है। पुलिस अधीक्षक का कहना है कि इन नियमों की अनदेखी के कारण केस कमजोर हो गया और पूरी कार्रवाई असफल रही।
जांच की जिम्मेदारी DSP गुरविंद्र को सौंपी गई। जांच में यह सामने आया कि प्रक्रिया में कमी के लिए सुनील संधू जिम्मेदार थे।

DSP पर लगाए गंभीर आरोप
इस जांच के दौरान ही 23 फरवरी को सुनील संधू ने फेसबुक पर एक पोस्ट डाली। इसमें उन्होंने कलायत के DSP ललित यादव पर आरोप लगाया कि उन्हें झूठे नशा तस्करी के मामले में फंसाने की धमकी दी गई।
पोस्ट में उन्होंने लिखा कि उन्होंने प्रशासन के कहने पर नशे के खिलाफ अभियान चलाया था, लेकिन अब उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने अपने परिवार का हवाला देते हुए कहा कि वह झूठ का साथ नहीं देंगे। यहां तक कि उन्होंने अपने नार्को टेस्ट तक की बात कही और खुद को भगत सिंह का वंशज बताते हुए सत्य के साथ खड़े रहने की बात लिखी।
यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और पुलिस विभाग के अंदरूनी विवाद ने सार्वजनिक रूप ले लिया।
जांच और ‘सोशल मीडिया ट्रायल’
SP उपासना सिंह ने बताया कि DSP पर लगाए गए आरोपों की जांच के लिए गुहला के DSP कुलदीप बेनीवाल को नियुक्त किया गया। जांच के दौरान संधू को बयान के लिए बुलाया गया, लेकिन इसी बीच उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर बयान देना शुरू कर दिया।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस तरह सार्वजनिक बयानबाजी से जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई और “सोशल मीडिया ट्रायल” जैसी स्थिति बन गई। विभाग के अनुसार, जांच में DSP पर लगाए गए आरोप तथ्यहीन पाए गए।
SP ने यह भी कहा कि सुनील संधू ने वर्दी का दुरुपयोग किया और नशा मुक्ति अभियान के दौरान आरोपियों को पकड़ने के वीडियो अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड किए, जबकि इसके लिए पुलिस विभाग के आधिकारिक प्लेटफॉर्म निर्धारित हैं।
पहले लाइन हाजिर, फिर बर्खास्तगी
विवाद के बाद सुनील संधू सहित नशा मुक्ति टीम के 9 सदस्यों को लाइन हाजिर किया गया था। यह एक प्रारंभिक अनुशासनात्मक कदम था। इसके बाद विभागीय जांच पूरी होने पर संधू को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
पुलिस विभाग का कहना है कि अनुशासन और नियमों का पालन पुलिस बल की बुनियाद है। यदि कोई कर्मचारी सार्वजनिक मंचों पर बिना अनुमति विभागीय मामलों को उठाता है, तो यह आचार संहिता का उल्लंघन है।
अस्पताल में भर्ती
विवाद के बाद से सुनील संधू की तबीयत खराब बताई जा रही है। वह कैथल के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। परिवार के अनुसार, वह मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।
व्यक्तिगत और सामाजिक पृष्ठभूमि
सुनील संधू कैथल के निवासी हैं। परिवार में उनकी पत्नी, दो छोटे बच्चे और मां हैं। उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका है।
वह पहले कॉन्स्टेबल के रूप में भर्ती हुए थे और बाद में पदोन्नत होकर हेड कॉन्स्टेबल बने। वह “मानवता विश्वास” नामक एक NGO से जुड़े रहे हैं। इसके माध्यम से गरीब लड़कियों की शादी और जरूरतमंदों के इलाज में सहयोग करने के लिए भी जाने जाते रहे हैं।
