Haryana 590 Crore Scam,: हरियाणा में 590 करोड़ का घोटाला में बड़ा एक्शन! 4 लोग हुए गिरफ्तार, इन लोगों पर गिरी गाज

हरियाणा में 590 करोड़ का घोटाला में बड़ा एक्शन! 4 लोग हुए गिरफ्तार, इन लोगों पर गिरी गाज

Haryana 590 Crore Scam: हरियाणा के सरकारी विभागों के खातों में 590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। Haryana Anti Corruption Bureau (ACB) ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है। बुधवार को पंचकूला में एसीबी प्रमुख Arshinder Singh Chawla ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का खुलासा किया।

एसीबी चीफ ने बताया कि 23 फरवरी को पंचायत विभाग से एक पत्र मिला था, जिसमें सरकारी धन के गबन की जानकारी दी गई थी। इसके आधार पर एसीबी में मुकदमा नंबर 4 दर्ज किया गया। इसके बाद देर रात छापेमारी कर रिभव ऋषि और अभय को गिरफ्तार किया गया।


कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

जांच में सामने आया कि रिभव ऋषि IDFC First Bank की चंडीगढ़ शाखा में मैनेजर था, जबकि अभय उसी बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर कार्यरत था।

एसीबी के अनुसार, घोटाले की प्लानिंग और फर्जी खातों के संचालन में इनकी मुख्य भूमिका रही। दोनों को राउंडअप कर पूछताछ की गई, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए।

जांच में पता चला कि “स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट” नामक खाते में करीब 300 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा कुछ धनराशि AU Small Finance Bank में भी भेजी गई।

इस मामले में अभय की पत्नी के भाई अभिषेक को भी गिरफ्तार किया गया है।

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590 करोड़ घोटाला – गिरफ्तार आरोपी

  1. रिभव ऋषि
    • पद: मैनेजर
    • बैंक: IDFC First Bank (चंडीगढ़ शाखा)
    • भूमिका: फर्जी खातों की प्लानिंग और फंड ट्रांसफर में मुख्य भूमिका
  2. अभय (पूरा नाम सार्वजनिक नहीं)
    • पद: रिलेशनशिप मैनेजर
    • बैंक: IDFC First Bank
    • भूमिका: खातों के संचालन और संदिग्ध लेनदेन में शामिल
  3. अभिषेक (अभय का साला)
    • संबंध: अभय की पत्नी का भाई
    • भूमिका: फर्जी कंपनियों/खातों के माध्यम से धन ट्रांसफर में कथित भूमिका
  4. स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट से जुड़ा एक व्यक्ति (नाम जांच में स्पष्ट किया जा रहा है)
    • भूमिका: करीब 300 करोड़ रुपये संबंधित खाते में ट्रांसफर होने के मामले में संदिग्ध कड़ी


जुलाई 2025 में ही लग गई थी भनक

सबसे बड़ा खुलासा यह है कि सरकार को इस गड़बड़ी की जानकारी पिछले साल जुलाई में ही मिल गई थी। वित्त विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) ने सभी विभागों को पत्र लिखकर अलर्ट भी किया था।

ACS के पत्र में क्या लिखा था?

वित्त विभाग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया था कि:

  • कई विभाग बैंक खातों के संचालन और एफडी में नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
  • निर्धारित निकटता मानदंडों का पालन किए बिना अन्य शहरों में खाते खोले जा रहे हैं।
  • बैंक शाखाओं का चयन व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के आधार पर किया जा रहा है।
  • एफडी करवाने में भी पक्षपात के संकेत मिल रहे हैं।

विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया कि पंचकूला स्थित कार्यालयों ने निर्देशों के विपरीत चंडीगढ़ में खाते खोले हैं।


15 दिन में इंटरनल ऑडिट का आदेश

ACS ने सभी विभागों को 15 दिन के भीतर अपने बैंक खातों और सावधि जमा (FD) की आंतरिक जांच करने के निर्देश दिए थे।

पत्र में कहा गया था कि:

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  • क्या खाते वित्त विभाग की गाइडलाइन के अनुसार खोले गए?
  • क्या आवश्यक अनुमोदन प्राप्त किए गए?
  • क्या सुधारात्मक कार्रवाई की जरूरत है?

30 जुलाई 2025 तक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इस इंटरनल ऑडिट को प्रभावी रूप से लागू किया गया या नहीं।


घोटाले की तीन कड़ियां – ऐसे चला 590 करोड़ का खेल

1️⃣ बैंक अधिकारियों की भूमिका

जांच के अनुसार, बैंक कर्मचारियों ने फर्जी फर्मों के खाते खोले। सरकारी विभागों से धनराशि इन खातों में ट्रांसफर की जाती थी। जरूरत पड़ने पर कुछ पैसा वापस भी भेजा जाता था, ताकि संदेह न हो।

2️⃣ प्राइवेट प्लेयर्स की अहम भूमिका

सरकारी धन को ठिकाने लगाने में प्राइवेट प्लेयर्स मध्य कड़ी बने। ये लोग अधिकारियों से संपर्क कर चंडीगढ़ की विशेष शाखाओं में खाते खुलवाते थे। बाद में पैसा फर्जी कंपनियों के जरिए शेयर मार्केट और अन्य निवेश माध्यमों में लगाया जाता था।

3️⃣ विभागीय अधिकारियों की मंजूरी

पंचकूला में अधिकांश विभागों के मुख्यालय हैं। आरोप है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने निकटतम शाखा के नियमों को नजरअंदाज कर चंडीगढ़ में खाते खुलवाने की अनुमति दी।


स्टॉक एक्सचेंज को पत्र से खुला राज

सूत्रों के अनुसार, IDFC बैंक ने फरवरी में स्टॉक एक्सचेंज को पत्र लिखकर 590 करोड़ के फ्रॉड की जानकारी दी। इसके बाद हरियाणा सरकार के अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

बताया जा रहा है कि वित्त विभाग को 2025 में ही शक हो गया था, लेकिन समय पर बड़ी जांच शुरू नहीं की गई।

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हाई-लेवल जांच कमेटी गठित

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्यपाल के आदेश पर उच्च स्तरीय जांच समिति बनाई गई है।

कमेटी की अध्यक्षता वित्त विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी Arun Kumar Gupta करेंगे।

सदस्यों में शामिल हैं:

  • अनीश यादव (डायरेक्टर, पंचायत विभाग)
  • विनय कुमार (कमिश्नर, नगर निगम पंचकूला)
  • सतीश कुमार (डिप्टी सेक्रेटरी, HPSC)

कमेटी यह जांच करेगी कि:

  • IDFC और AU बैंक को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया क्या थी?
  • किसने धनराशि ट्रांसफर की अनुमति दी?
  • राज्य की बैंकिंग नीति में क्या खामियां थीं?
  • भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए नई नीति कैसे बनाई जाए?

जांच रिपोर्ट एक महीने में सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।


आगे क्या?

एसीबी ने संकेत दिए हैं कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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590 करोड़ का यह मामला हरियाणा के प्रशासनिक और बैंकिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह राज्य के इतिहास के बड़े वित्तीय घोटालों में शामिल हो सकता है।

सरकार का दावा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और सार्वजनिक धन की हर एक पाई की रिकवरी की जाएगी।

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