Haryana Fake University: हरियाणा से एक बड़ी खबर सामने आई है। University Grants Commission (UGC) ने फरीदाबाद में पंजीकृत एक कथित फर्जी यूनिवर्सिटी ‘मैजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी’ का खुलासा किया है। UGC द्वारा हाल ही में जारी की गई 32 फर्जी यूनिवर्सिटीज की सूची में इस संस्थान का नाम भी शामिल है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सूची में शामिल संस्थानों को किसी भी प्रकार की डिग्री प्रदान करने का अधिकार नहीं है।
जानकारी के अनुसार, इस यूनिवर्सिटी का रजिस्ट्रेशन वर्ष 2024-25 में कराया गया था। दस्तावेजों में इसका पता बल्लभगढ़ के बी-38, फर्स्ट फ्लोर पर दर्ज है। लेकिन मौके पर जांच में सामने आया कि वहां कोई सक्रिय कार्यालय नहीं है। बताया जा रहा है कि उक्त कार्यालय वर्ष 2022 से बंद पड़ा हुआ है और वहां किसी प्रकार का स्टाफ भी मौजूद नहीं है।
UGC ने अपनी आधिकारिक सूची में साफ किया है कि देश के 12 राज्यों में कुल 32 ऐसे संस्थान चिन्हित किए गए हैं, जो खुद को विश्वविद्यालय बताकर छात्रों को गुमराह कर सकते हैं। आयोग ने छात्रों और अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इन संस्थानों से प्राप्त डिग्री न तो सरकारी नौकरी के लिए मान्य होगी और न ही उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए स्वीकार की जाएगी।
इस मामले में यूनिवर्सिटी के प्रोप्राइटर डॉ. चन्द्रपाल यादव का कहना है कि उन्होंने केवल अपने ब्रांड का रजिस्ट्रेशन कराया था। उनका दावा है कि उन्होंने किसी भी छात्र का एडमिशन नहीं किया है और न ही किसी प्रकार की डिग्री या डिप्लोमा जारी किया है। उनके अनुसार, अभी उन्हें किसी प्रकार की शैक्षणिक डिग्री प्रदान करने की अधिकृत अनुमति प्राप्त नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2020 में ब्रांड रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया गया था, जिसे 2024-25 में स्वीकृति मिली। हालांकि, ऑनलाइन सर्च करने पर अब भी बल्लभगढ़ का पुराना पता ही सामने आता है।
डॉ. चन्द्रपाल का यह भी कहना है कि उन्होंने फरीदाबाद के मथुरा रोड स्थित दशमेश प्लाजा (308A) में नया कार्यालय खोला है। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि होडल विधानसभा क्षेत्र के गांव लिखी में करीब 5 एकड़ भूमि पर इमारत का निर्माण कार्य जारी है। भवन निर्माण पूरा होने के बाद वह यूनिवर्सिटी से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की योजना बना रहे थे।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2007 में उन्हें मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ के अंतर्गत रेडक्रॉस में लेक्चरर का पद मिला था, जहां वे फर्स्ट एड और होम नर्सिंग की ट्रेनिंग देते थे। इसके बाद उन्होंने अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ शब्द का प्रयोग शुरू किया।
फिलहाल, UGC की चेतावनी के बाद यह मामला चर्चा में है। शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों को किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करनी चाहिए।
