Kurukshetra Bypass: कुरुक्षेत्र जिले के लोगों के लिए एक बड़ी और लंबे समय से प्रतीक्षित राहत की खबर सामने आई है। शहर में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव और जाम की समस्या को देखते हुए National Highways Authority of India (NHAI) ने कुरुक्षेत्र बाईपास परियोजना के लिए तीन वैकल्पिक रूट तैयार किए हैं। इन विकल्पों पर सार्वजनिक परामर्श के बाद अब इन्हें सरकार के पास भेजा जाएगा, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि चुने गए विकल्प पर जल्द ही कार्य शुरू होगा, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा।
क्यों जरूरी है बाईपास?
धार्मिक नगरी में बढ़ता ट्रैफिक बना चुनौती
कुरुक्षेत्र केवल एक जिला मुख्यालय ही नहीं, बल्कि देश-विदेश में प्रसिद्ध धार्मिक नगरी भी है। ब्रह्मसरोवर, ज्योतिसर और अन्य पवित्र स्थलों पर वर्षभर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है। इसके अलावा शहर के आसपास औद्योगिक और शैक्षणिक संस्थानों के विस्तार से वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मार्गों का ट्रैफिक भी शहर के बीच से गुजरता है, जिससे पीक ऑवर में जाम की स्थिति सामान्य हो गई है। भारी वाहनों के कारण दुर्घटनाओं और प्रदूषण की समस्या भी बढ़ी है। ऐसे में बाईपास परियोजना को शहर के भविष्य के विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पब्लिक कंसल्टेशन में रखे गए तीन विकल्प
दक्षिण और उत्तर दिशा में प्रस्तावित रूट
NHAI ने प्रारंभिक सर्वेक्षण और ट्रैफिक अध्ययन के बाद तीन संभावित रूट तैयार किए हैं। हाल ही में आयोजित पब्लिक कंसल्टेशन मीटिंग में इन विकल्पों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया।
- पहला विकल्प (दक्षिण दिशा):
इस रूट की कुल लंबाई 36.9 किलोमीटर प्रस्तावित है। यह शहर के दक्षिणी हिस्से से होकर गुजरेगा और बाहरी ट्रैफिक को सीधे आगे के राष्ट्रीय मार्ग से जोड़ेगा। - दूसरा विकल्प (उत्तर दिशा):
यह रूट 37.1 किलोमीटर लंबा होगा। उत्तर दिशा से गुजरने वाला यह मार्ग ग्रामीण क्षेत्रों से होकर शहर के बाहरी हिस्से को कवर करेगा। - तीसरा विकल्प (दक्षिण दिशा, शहर के निकट):
यह 35.2 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित रूट है, जो शहर के अपेक्षाकृत नजदीक से गुजरेगा। इसकी लंबाई कम होने के कारण लागत और समय में बचत की संभावना जताई जा रही है।
इन तीनों प्रस्तावों को अब राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। सरकार स्थानीय परिस्थितियों, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय प्रभाव और जनहित को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लेगी।
ट्रैफिक सर्वे के आधार पर बनी योजना
पिहोवा, मथाना और दामला में हुआ अध्ययन
NHAI द्वारा अधिकृत एजेंसी ने पिहोवा, गांव मथाना और यमुनानगर के समीप गांव दामला में विस्तृत ट्रैफिक सर्वे किया। सर्वे में वाहनों की दैनिक संख्या, भारी वाहनों की आवाजाही, दुर्घटना संभावित क्षेत्र और भविष्य की यातायात वृद्धि का आकलन किया गया।
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर तीनों विकल्पों का प्रारूप तैयार किया गया। पहले चरण में पिहोवा 152-D से लेकर मथाना के पास गांव बीड़ सोंटी तक फोरलेन सड़क विकसित करने की योजना है। इससे प्रारंभिक स्तर पर ट्रैफिक डायवर्जन संभव हो सकेगा।
DPR तैयार, अब अंतिम स्वीकृति का इंतजार
सुभाष सुधा ने दी जानकारी
पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने बताया कि बाईपास परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है। उन्होंने सुझाव दिया कि ज्योतिसर से उमरी होते हुए मथाना तक और ज्योतिसर से खानपुर कोलियां होते हुए मथाना तक वैकल्पिक मार्गों पर भी विचार किया जाए।
उनके अनुसार, परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने से लागत और निर्माण समय में संतुलन बनाया जा सकता है। DPR में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण स्वीकृति, पुल-पुलियों का निर्माण और लागत अनुमान शामिल है।
यमुनानगर तक बनेगा सीधा कनेक्शन
लाडवा और रादौर में भी प्रस्तावित बाईपास
चुने गए विकल्प के अनुसार बाईपास का निर्माण होने के बाद यमुनानगर तक फोरलेन सड़क का विस्तार किया जाएगा। साथ ही लाडवा और रादौर में भी बाईपास विकसित करने की योजना है। इससे पूरा कॉरिडोर क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत होगा और औद्योगिक तथा वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
यमुनानगर से सीधा कनेक्शन बनने से न केवल कुरुक्षेत्र बल्कि आसपास के जिलों को भी लाभ मिलेगा। परिवहन लागत कम होगी और लॉजिस्टिक्स में तेजी आएगी।
20 साल आगे की सोच से बने योजना
विधायक अशोक अरोड़ा का सुझाव
थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा ने कहा कि कुरुक्षेत्र एक धार्मिक नगरी है, जहां सालभर पर्यटकों का आना-जाना रहता है। इसलिए बाईपास योजना केवल वर्तमान जरूरतों को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि अगले 20 वर्षों की संभावित वृद्धि को देखते हुए बनाई जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि बाईपास से जुड़े गांवों के लिए समुचित एंट्री और एग्जिट प्वाइंट सुनिश्चित किए जाएं, ताकि स्थानीय निवासियों को असुविधा न हो। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि परिवहन को ध्यान में रखते हुए डिजाइन तैयार करने की आवश्यकता है।
जाम, प्रदूषण और दुर्घटनाओं से मुक्ति की उम्मीद
स्थानीय नागरिकों और व्यापारिक संगठनों ने पब्लिक कंसल्टेशन मीटिंग में अपने सुझाव दिए। अधिकांश लोगों का कहना है कि बाईपास बनने से शहर के मुख्य बाजारों और धार्मिक स्थलों के आसपास का ट्रैफिक दबाव कम होगा। भारी वाहनों को शहर के बाहर डायवर्ट किया जा सकेगा, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
इसके अलावा प्रदूषण स्तर में भी गिरावट की उम्मीद है। वर्तमान में मुख्य सड़कों पर लगातार जाम के कारण ईंधन की खपत और ध्वनि प्रदूषण दोनों बढ़ रहे हैं।
सरकार की मंजूरी के बाद शुरू होगा काम
अब तीनों विकल्पों को सरकार के पास भेजा जाएगा। संबंधित विभाग भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय अनुमति और वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करेंगे। मंजूरी मिलने के बाद टेंडर जारी किए जाएंगे और निर्माण कार्य शुरू होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी होती हैं, तो अगले कुछ वर्षों में कुरुक्षेत्र को आधुनिक बाईपास सुविधा मिल सकती है।
कुरुक्षेत्र बाईपास परियोजना केवल एक सड़क निर्माण योजना नहीं, बल्कि शहर के दीर्घकालिक विकास की आधारशिला है। बढ़ती आबादी, धार्मिक पर्यटन और औद्योगिक विस्तार को देखते हुए यह परियोजना आने वाले वर्षों में क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक संरचना को नई दिशा दे सकती है। अब निगाहें सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि तीन विकल्पों में से कौन-सा रूट कुरुक्षेत्र के भविष्य की राह बनेगा।
