Haryana Gram Panchayat: हरियाणा के सिरसा जिले की दो ग्राम पंचायतों ने ऐसे आदेश जारी किए हैं, जिनकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। सोशल मीडिया पर पंचायतों के लेटर वायरल हैं। इनमें गांव में भिखारियों के प्रवेश पर रोक, मंगलमुखी समाज को बधाई की तय राशि (1100 रुपये) और ऑनलाइन पार्सल डिलीवरी करने वालों की एंट्री पर प्रतिबंध जैसे फैसले शामिल हैं।
पंचायतों का तर्क है कि फसल कटाई के समय गांव खाली रहते हैं और चोरी, ठगी व बच्चों के किडनेपिंग की घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए सुरक्षा के मद्देनज़र ये कदम उठाए गए हैं।
किन पंचायतों ने क्या आदेश दिए?
ग्राम पंचायत कागदाना
कागदाना की सरपंच प्रोमिला देवी की ओर से जारी पत्र के अनुसार 22 तारीख को ग्राम ज्ञान केंद्र में बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से ये निर्णय लिए गए:
- गांव में मंगता-भिखारी प्रवेश नहीं करेंगे
- मंगलमुखी समाज को केवल 1100 रुपये बधाई के रूप में दिए जाएंगे
- डीजे रात 10 बजे तक ही
- गांव को नशा मुक्त बनाने का संकल्प
- छोटे बच्चों और युवाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
पंचायत ने कहा है कि नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा और गांव में जगह-जगह नोटिस बोर्ड लगाए जाएंगे।

ग्राम पंचायत नेजियाखेड़ा
नेजियाखेड़ा पंचायत के सरपंच सोनू कालेरा की ओर से जारी पत्र में लिखा गया है:
- गांव में अनजान व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित
- प्रेशर हॉर्न और लाउडस्पीकर पर रोक
- मंगलमुखी समाज को बधाई के तौर पर 1100 रुपये तय
- नियम तोड़ने पर जुर्माना
साथ ही, अगर कोई दान देना चाहता है तो वह गोशाला में दान कर सकता है।

🌾 फसल कटाई और सुरक्षा की चिंता
सरपंच प्रोमिला देवी का कहना है कि फसल कटाई का समय आने वाला है। ऐसे में अधिकतर ग्रामीण खेतों में रहते हैं और घरों में महिलाएं अकेली रह जाती हैं। इस दौरान बाहरी लोगों की आवाजाही से चोरी या वारदात का खतरा रहता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोग “मंगलमुखी” बनकर आते हैं और बधाई के नाम पर जबरन पैसे मांगते हैं। वहीं नेजियाखेड़ा के सरपंच सोनू कालेरा ने कहा कि हाल के दिनों में बच्चों के किडनेपिंग और ठगी के मामले बढ़े हैं, इसलिए सख्ती जरूरी है।
कानूनी और सामाजिक सवाल
इन आदेशों ने कई सवाल भी खड़े किए हैं:
- क्या पंचायत को किसी विशेष समुदाय के प्रवेश या राशि तय करने का अधिकार है?
- ऑनलाइन पार्सल डिलीवरी रोकना कितना व्यावहारिक है?
- क्या यह कदम सुरक्षा के लिए जरूरी है या अधिकारों का उल्लंघन?
विशेषज्ञ मानते हैं कि पंचायतों को सुरक्षा के लिए कदम उठाने का अधिकार है, लेकिन वे संविधान और कानून के दायरे में होने चाहिए।
पहले भी जारी हुए ऐसे फरमान
सिरसा जिले में इससे पहले भी कुछ पंचायतों ने बाहरी लोगों पर रोक लगाने या संदिग्ध गतिविधियों पर सख्ती के आदेश जारी किए थे। ग्रामीणों का दावा है कि ऐसे फैसलों के बाद वारदातों में कमी आई है।
आगे क्या?
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है। सोशल मीडिया पर बहस तेज है — कुछ लोग इसे गांव की सुरक्षा के लिए सही कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे भेदभावपूर्ण और अव्यावहारिक मान रहे हैं।
यह मामला सिर्फ दो गांवों का नहीं, बल्कि पंचायतों के अधिकार और सामाजिक संतुलन का भी है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक प्रतिक्रिया और कानूनी स्थिति साफ हो सकती है।
