Premanand Ji Maharaj: प्रेम मिलते-मिलते क्यों रह जाता है? संत ने बताई एक चौंकाने वाली वजह

प्रेम क्यों नहीं मिलता प्रेम क्यों नहीं मिलता

Premanand Ji Maharaj: वृंदावन में हुए एक सत्संग में संत Premanand ji ने प्रेम और भक्ति के विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि मनुष्य को सच्चा प्रेम प्राप्त करने से सबसे अधिक रोकने वाली चीज़ अहंकार और स्वार्थ है।

प्रेम और अहंकार का संबंध

महाराज ने समझाया कि जब तक व्यक्ति के भीतर “मैं” और “मेरा” की भावना रहती है, तब तक प्रेम शुद्ध नहीं हो पाता। सच्चा प्रेम वह है जिसमें अपेक्षा, अधिकार और स्वार्थ कम होते जाते हैं और समर्पण बढ़ता है। विभिन्न स्रोतों में भी उनके उपदेशों का सार यही बताया गया है कि सच्चा प्रेम निःस्वार्थ होता है और अहंकार उसका सबसे बड़ा शत्रु है

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आसक्ति भी बनती है बाधा

सत्संगों में यह भी समझाया जाता है कि जो प्रेम केवल शरीर, सुख या अपेक्षाओं पर आधारित हो, वह प्रेम नहीं बल्कि आसक्ति है। ऐसी आसक्ति मन को भटकाती है और ईश्वर या उच्च भाव से दूर कर देती है।

प्रेम का मार्ग कैसा हो

महाराज के अनुसार:

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  • प्रेम में समर्पण होना चाहिए
  • प्रेम में निःस्वार्थ भावना होनी चाहिए
  • प्रेम मनुष्य को ईश्वर के करीब ले जाए, दूर नहीं

जब इन गुणों का विकास होता है तो प्रेम साधना बन जाता है और जीवन में शांति तथा संतोष आता है।

संतों के अनुसार प्रेम प्राप्ति का सबसे बड़ा बाधक बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि मन का अहंकार, स्वार्थ और आसक्ति है। जब व्यक्ति इनसे ऊपर उठने का प्रयास करता है, तब प्रेम का वास्तविक अनुभव संभव होता है।

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