Haryana News: हरियाणा कैथल की देसी गाय यशोदा ने रचा इतिहास, बनाया नया रिकॉर्ड

कैथल की देसी गाय यशोदा ने रचा इतिहास

Haryana News: हरियाणा के कैथल जिले के खरक पांडवा गांव में देसी नस्ल की गाय ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। किसान सुनील सहारण की देसी गाय यशोदा ने एक ही दिन में 23 लीटर 330 ग्राम दूध देकर न केवल गांव बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है। यह उपलब्धि देसी नस्ल की गायों की क्षमता और वैज्ञानिक तरीके से की गई देखभाल का प्रत्यक्ष प्रमाण मानी जा रही है।

पहले 17 लीटर, अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा

यशोदा गाय इससे पहले क्षेत्र में करीब 17 लीटर दूध देने के लिए जानी जाती थी। हाल के महीनों में उसके दुग्ध उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी देखी गई और अब 21 लीटर से अधिक दूध देने के बाद 23 लीटर से ज्यादा उत्पादन ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। यशोदा शुद्ध हरियाणा देसी नस्ल की गाय है, जिसे आमतौर पर कम उत्पादन वाली नस्ल माना जाता रहा है, लेकिन इस रिकॉर्ड ने उस धारणा को तोड़ दिया है।

Pipli Kisan Rally: पीपली अनाज मंडी में आज किसान-मजदूर जनक्रांति रैली, पुलिस ने डायवर्ट किए ये रूट, घर से निकलने से पहले देखें
Pipli Kisan Rally: पीपली अनाज मंडी में आज किसान-मजदूर जनक्रांति रैली, पुलिस ने डायवर्ट किए ये रूट, घर से निकलने से पहले देखें

रिकॉर्ड की पारदर्शी जांच

इस रिकॉर्ड को लेकर किसी भी प्रकार का संदेह न रहे, इसके लिए दूध निकालने की प्रक्रिया गांव के गणमान्य लोगों की मौजूदगी में कराई गई। मौके पर सरपंच प्रतिनिधि सुरेश सहारण और पूर्व सरपंच एवं खाप प्रधान हजूर सिंह मौजूद रहे। दूध दोहन की पूरी प्रक्रिया बाहर से आए लोगों के सामने की गई और इसे सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीम भी किया गया, ताकि पूरी पारदर्शिता बनी रहे।

com

छह महीने की उम्र से विशेष देखभाल

किसान सुनील सहारण ने बताया कि यशोदा की छह महीने की उम्र से ही उन्होंने उसकी विशेष देखभाल शुरू कर दी थी। इसमें संतुलित हरा चारा, घर पर तैयार किया गया पौष्टिक दाना, समय-समय पर टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच, साफ-सुथरी और हवादार गोशाला तथा तनावमुक्त वातावरण शामिल है। उन्होंने बताया कि गाय को परिवार के सदस्य की तरह रखा जाता है, जिससे वह स्वस्थ और प्रसन्न रहती है, जिसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है।

Haryana Private School:
Govt School Update: हरियाणा सरकार का नया नियम: अब स्कूल खुद करा सकेंगे मरम्मत, नहीं लेनी होगी अनुमति

गो-पालकों के लिए प्रेरणा

यशोदा की इस उपलब्धि से न केवल कैथल बल्कि पूरे हरियाणा और देशभर के गो-पालकों में देसी नस्लों के प्रति नई रुचि पैदा हुई है। कई किसान अब विदेशी नस्लों की बजाय देसी गायों पर ध्यान देने लगे हैं, क्योंकि देसी नस्लों का रखरखाव कम खर्चीला होता है और इनके दूध की बाजार में बेहतर कीमत भी मिलती है।

देसी नस्लों की बढ़ती पहचान

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिकॉर्ड देसी नस्लों की उपयोगिता और संभावनाओं को उजागर करता है। सही देखभाल, संतुलित आहार और अनुकूल वातावरण मिलने पर देसी गायें भी उच्च दुग्ध उत्पादन कर सकती हैं। यशोदा की सफलता अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।

Patwari
Govt Scheme Haryana: बड़ा अपडेट, अब पटवारी करेंगे डिजिटल सर्वे,सरकार देगी 4,156 स्मार्ट टैबलेट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *