Success Story Haryana: पिता किसान-मां आशा वर्कर, फतेहाबाद का बेटा BSF में बना कमाडेंट, ट्रेनिंग में जीता ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’

पिता किसान-मां आशा वर्कर, फतेहाबाद का बेटा BSF में बना कमाडेंट, ट्रेनिंग में जीता ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’

Success Story Haryana: हरियाणा के फतेहाबाद जिले के भट्टू क्षेत्र के गांव पीलीमंदोरी के एक साधारण किसान परिवार से निकलकर सुनील गोदारा ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सुनील का चयन बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर हुआ है। खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी ट्रेनिंग के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए बेस्ट ट्रेनी अवॉर्ड और प्रतिष्ठित स्वॉर्ड ऑफ ऑनर भी हासिल किया। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बनी हुई है।

ग्वालियर में हुई पासिंग आउट परेड

मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में बीएसएफ अकादमी में एक वर्ष की कड़ी ट्रेनिंग पूरी होने के बाद शनिवार को पासिंग आउट परेड आयोजित की गई। इस दौरान बीएसएफ के डायरेक्टर जनरल प्रवीण कुमार ने सुनील गोदारा को बेस्ट ट्रेनी अवॉर्ड देकर सम्मानित किया। परेड के बाद सुनील को एक महीने की छुट्टी मिली है, जिसके बाद वे त्रिपुरा में अपनी ड्यूटी जॉइन करेंगे।

ट्रेनिंग के दौरान शारीरिक दक्षता, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सामरिक अभ्यास सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन के आधार पर बेस्ट ट्रेनी का चयन किया जाता है। 71 प्रशिक्षुओं की बैच में यह सम्मान प्राप्त करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

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यूपीएससी 2023 में हुआ चयन

सुनील के मित्र राज गोदारा ने बताया कि सुनील गोदारा का चयन यूपीएससी 2023 के परिणाम में हुआ था। हालांकि उस समय कोरोना महामारी के कारण ट्रेनिंग का शेड्यूल प्रभावित हुआ और प्रशिक्षण समय पर शुरू नहीं हो सका। बाद में फरवरी 2025 में ट्रेनिंग का कार्यक्रम तय हुआ और 8 फरवरी से ग्वालियर में प्रशिक्षण शुरू हुआ। लगभग एक वर्ष तक चले इस प्रशिक्षण के दौरान सुनील ने हर अभ्यास और परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

साधारण परिवार से असाधारण उपलब्धि

सुनील गोदारा का परिवार एक सामान्य किसान परिवार है। उनके पिता कृष्ण गोदारा खेती-बाड़ी करते हैं और माता राजबाला आशा वर्कर के रूप में कार्यरत हैं। परिवार के पास लगभग चार एकड़ जमीन है, जिससे खेती कर परिवार का गुजारा होता रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया।

सुनील की एक छोटी बहन ममता गोदारा हैं, जिन्होंने हाल ही में नेट परीक्षा पास की है और वर्तमान में बैंगलोर से एलएलएम की पढ़ाई कर रही हैं। परिवार के सदस्यों का मानना है कि शिक्षा और मेहनत के बल पर ही सुनील ने यह मुकाम हासिल किया है।

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पिता की नौकरी छूटने के बाद बदली परिस्थितियां

परिवार के जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब आर्थिक चुनौतियां बढ़ गई थीं। सुनील के पिता कृष्ण गोदारा का चयन चौटाला सरकार के समय बिजली निगम में एसए पद पर हुआ था, लेकिन बाद में कुछ परिस्थितियों के कारण उस भर्ती के कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया। इसके बाद उन्होंने गांव में ही खेती-बाड़ी शुरू कर दी। इन परिस्थितियों ने परिवार को कठिनाइयों का सामना करना सिखाया और शायद यही संघर्ष सुनील की प्रेरणा भी बना।

शिक्षा का सफर

सुनील ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव पीलीमंदोरी के स्कूल से पांचवीं कक्षा तक प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय, खाराखेड़ी से 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की। आगे की पढ़ाई के लिए वे दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज गए। पढ़ाई के दौरान ही उनका लक्ष्य स्पष्ट था कि उन्हें देश की सेवा करनी है।

नौकरी के साथ जारी रखी तैयारी

करीब पांच वर्ष पहले सुनील का चयन हरियाणा के शिक्षा विभाग में क्लर्क के पद पर हुआ था। उन्होंने चार साल तक स्कूल में क्लर्क की नौकरी की। इसी दौरान वे यूपीएससी की तैयारी भी करते रहे। नौकरी और पढ़ाई को साथ लेकर चलना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने धैर्य और अनुशासन बनाए रखा। वर्ष 2023 में उन्होंने यूपीएससी का आखिरी प्रयास दिया और उसी प्रयास में सफलता हासिल की।

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खेलों में भी रहे आगे

पढ़ाई के साथ-साथ सुनील खेलों में भी सक्रिय रहे हैं। वे नेशनल लेवल के फुटबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं और कई प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं। खेलों से मिली फिटनेस और अनुशासन ने उन्हें ट्रेनिंग के दौरान भी काफी मदद की। बीएसएफ प्रशिक्षण में शारीरिक क्षमता और टीमवर्क का विशेष महत्व होता है, जिसमें उनका अनुभव काम आया।

बैच में 71 प्रशिक्षु, सुनील बने सर्वश्रेष्ठ

सुनील ने बताया कि उनकी बैच में कुल 71 प्रशिक्षुओं ने ट्रेनिंग ली थी। सभी प्रशिक्षुओं को अलग-अलग स्थानों पर ड्यूटी दी जा रही है। इतनी बड़ी बैच में बेस्ट ट्रेनी अवॉर्ड और स्वॉर्ड ऑफ ऑनर हासिल करना उनके लिए गर्व का क्षण रहा। उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और दोस्तों को दिया।

परिवार और गांव में खुशी का माहौल

सुनील की सफलता की खबर मिलते ही गांव पीलीमंदोरी और आसपास के क्षेत्रों में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि सुनील ने गांव का नाम रोशन किया है और अब वे अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बनेंगे। गांव के कई युवा पहले से सेना में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अधिकारी पद पर चयन होने का यह पहला अवसर है।

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युवाओं के लिए प्रेरणा

सुनील गोदारा अपने परिवार में पहले युवा हैं जो डिफेंस सेक्टर में अधिकारी बने हैं। उनका मानना है कि मेहनत, धैर्य और निरंतर प्रयास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता जरूर मिलती है।

आगे की जिम्मेदारी

एक महीने की छुट्टी के बाद सुनील गोदारा त्रिपुरा में अपनी ड्यूटी जॉइन करेंगे। सीमा सुरक्षा बल में असिस्टेंट कमांडेंट का पद जिम्मेदारी भरा होता है, जिसमें सीमा सुरक्षा, जवानों का नेतृत्व और कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य शामिल होते हैं। सुनील की उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

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