Masoom Sharma controversy: हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा और मुआना गांव के पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा के बीच 18 फरवरी को जींद में हुए कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ विवाद अभी तक शांत नहीं हुआ है। मामला अब व्यक्तिगत बहस से आगे बढ़कर पंचायत और जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ गया है। शनिवार शाम जींद में मासूम शर्मा के बड़े भाई विकास ने पूर्व सरपंच से मुलाकात कर माफी मांगी और विवाद को आगे न बढ़ाने की अपील की, लेकिन पूर्व सरपंच ने स्पष्ट कर दिया कि वे अकेले समझौता नहीं करेंगे।
उनका कहना है कि मासूम शर्मा को स्वयं यहां आकर पंचायत और सरपंच प्रतिनिधियों के सामने सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी।
18 फरवरी का कार्यक्रम और विवाद की शुरुआत
विवाद की शुरुआत 18 फरवरी को जींद में आयोजित एक निजी कार्यक्रम से हुई। यह कार्यक्रम मासूम शर्मा के बहनोई धर्मवीर आर्य की 25वीं शादी की सालगिराह के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे।
जैसे ही मासूम शर्मा स्टेज पर पहुंचे, भीड़ बढ़ती चली गई। बताया जाता है कि स्टेज छोटा था और उस पर कई लोग पहले से मौजूद थे। इसी दौरान मासूम शर्मा ने मंच खाली करने की अपील की।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मासूम ने कहा कि उनके परफॉर्मेंस के दौरान कोई भी व्यक्ति, चाहे वह सरपंच हो, विधायक हो या मंत्री, मंच पर न रहे और नीचे बैठकर कार्यक्रम देखे। इसी बयान के बाद माहौल गरमा गया।
वायरल वीडियो ने बढ़ाया विवाद
कार्यक्रम के दौरान कही गई बातों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में मासूम शर्मा यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि वे अपने परफॉर्मेंस के दौरान किसी की पदवी नहीं मानते और सभी को नीचे बैठकर कार्यक्रम देखने की बात कह रहे हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला तेजी से फैल गया। सरपंच प्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं ने इसे जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जोड़ते हुए आपत्ति जताई।
मासूम शर्मा के बड़े भाई विकास की सफाई
शनिवार शाम जींद में मासूम शर्मा के बड़े भाई विकास ने पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा से मुलाकात की। दैनिक भास्कर एप की टीम से बातचीत में विकास ने कहा कि कार्यक्रम का स्टेज छोटा था और भीड़ अचानक बढ़ गई थी।
उन्होंने कहा,
“जब मासूम ने गाना शुरू किया तो काफी लोग स्टेज पर आ गए। इस दौरान सरपंच जी दिखाई नहीं दिए। मासूम की किसी को अपमानित करने की मंशा नहीं थी।”
विकास ने यह भी कहा कि अगर मासूम की बात से किसी को ठेस पहुंची है तो वे बड़े भाई होने के नाते पूरे हरियाणा के सरपंचों, सरपंच प्रतिनिधियों और उपस्थित लोगों से माफी मांगते हैं। उन्होंने विवाद को आगे न बढ़ाने की अपील की।
पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा का सख्त रुख
पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि वे अकेले समझौता नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यह मामला अब व्यक्तिगत नहीं रहा, बल्कि सरपंच प्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ गया है।
उन्होंने कहा,
“जिस तरह स्टेज पर बातें कही गईं, उसी तरह यहां आकर लाइव माफी मांगनी पड़ेगी। जब तक मासूम स्वयं आकर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगेंगे, तब तक कोई पंचायत नहीं होगी।”
राजेंद्र शर्मा ने बताया कि विकास ने अपने फोन से मासूम शर्मा से बात कराई। मासूम ने बाहर होने की बात कही, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि माफी व्यक्तिगत रूप से आकर ही मांगी जानी चाहिए।
समझौते की शर्तें और पंचायत की मांग
पूर्व सरपंच ने कहा कि 25-26 फरवरी तक मासूम शर्मा के जींद आने की संभावना है। उनके आने के बाद पंचायत के सामने बैठकर पूरे मामले का समाधान किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि वे आगे विवाद नहीं चाहते, लेकिन सम्मान से समझौता जरूरी है। अगर बिना सार्वजनिक माफी के समझौता किया गया तो उनके साथ खड़े सरपंच और प्रतिनिधि इसे गलत ठहराएंगे।
धक्का-मुक्की और माहौल में तनाव
18 फरवरी के कार्यक्रम के दौरान विवाद इतना बढ़ गया था कि मासूम शर्मा और पूर्व सरपंच के समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। हालांकि, किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर उसी समय बातचीत से मामला सुलझा लिया जाता तो विवाद इतना आगे नहीं बढ़ता।
प्रेस कॉन्फ्रेंस और चुनावी चुनौती
विवाद बढ़ने के बाद पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मासूम शर्मा को पंच का चुनाव लड़ने की चुनौती दे डाली। उन्होंने कहा कि “मासूम को पैसे देकर कहीं भी नचवा लो”, लेकिन जनप्रतिनिधियों का सम्मान सर्वोपरि है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो महापंचायत बुलाई जाएगी।
फोन पर हुई बातचीत
पूर्व सरपंच के अनुसार, मासूम शर्मा से फोन पर बातचीत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अब दिल से समझौता होगा, लेकिन इसके लिए मासूम को आमने-सामने आकर माफी मांगनी होगी।
उन्होंने कहा कि यह रिश्तेदारी का मामला है और वे इसे आगे नहीं बढ़ाना चाहते, लेकिन सम्मान की रक्षा आवश्यक है।
राजनीतिक और सामाजिक असर
यह विवाद केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और बयानों ने इसे व्यापक चर्चा का विषय बना दिया है।
हरियाणा में सरपंच और पंचायत प्रतिनिधियों का सामाजिक महत्व काफी बड़ा है। ऐसे में यह मामला सम्मान और प्रतिष्ठा से जुड़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विवाद जल्द नहीं सुलझा तो यह राजनीतिक रंग भी ले सकता है।
आगे क्या?
अब सबकी नजर 25-26 फरवरी पर है। यदि मासूम शर्मा जींद आकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हैं तो मामला शांत हो सकता है। अन्यथा पंचायत या महापंचायत की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल, दोनों पक्ष समाधान की बात तो कर रहे हैं, लेकिन शर्तों पर सहमति बनना बाकी है।
जींद में 18 फरवरी को शुरू हुआ यह विवाद अब सम्मान और सार्वजनिक माफी के मुद्दे पर अटका हुआ है। एक तरफ मासूम शर्मा के बड़े भाई ने खेद जताया है, वहीं दूसरी तरफ पूर्व सरपंच सार्वजनिक माफी पर अड़े हुए हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह मामला आपसी बातचीत से सुलझता है या पंचायत के जरिए इसका समाधान निकलता है।
