Haryana Congress: हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर सियासी घमासान तेज हो गया है। पार्टी ने क्रॉस वोटिंग के आरोप में अपने 5 विधायकों को कुछ ही घंटों के अंतराल में दूसरा और पहले से ज्यादा सख्त नोटिस जारी कर दिया है। नए नोटिस में स्पष्ट तौर पर “क्रॉस वोटिंग” का जिक्र किया गया है, जिससे मामला अब और गंभीर हो गया है।
कांग्रेस अनुशासन समिति के चेयरमैन धर्मपाल मलिक के निर्देश पर यह नोटिस जारी किया गया। जिन विधायकों को नोटिस भेजा गया है, उनमें रेनू बाला (साढौरा), शैली चौधरी (नारायणगढ़), मोहम्मद इजराइल (हथीन), मोहम्मद इलियास (पुन्हाना) और जरनैल सिंह (रतिया) शामिल हैं। पहले चार विधायकों को 19 मार्च को नोटिस मिला था, जबकि जरनैल सिंह को 20 मार्च को नोटिस जारी किया गया। इसके बाद शुक्रवार शाम को सभी को संशोधित और सख्त नोटिस भेजा गया।
क्या है नए नोटिस में?
नए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि इन विधायकों ने 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध को वोट नहीं दिया। बैलेट पेपर में उनका नाम पहले नंबर पर था, लेकिन विधायकों ने दूसरे उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया।
पार्टी का कहना है कि यह कदम जानबूझकर उठाया गया और इससे कांग्रेस प्रत्याशी को हराने की कोशिश की गई। इसे पार्टी विरोधी गतिविधि और अनुशासनहीनता करार दिया गया है।
नोटिस में सभी विधायकों को 7 दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है। साथ ही साफ कर दिया गया है कि कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। जवाब संतोषजनक न होने पर कड़ी कार्रवाई, जिसमें निलंबन या निष्कासन शामिल हो सकता है, की जाएगी।
पहले और नए नोटिस में बड़ा अंतर
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात नोटिस की भाषा में बदलाव है।
- पहले नोटिस में वोट “कैंसिल/इनवेलिड” होने की बात कही गई थी
- नए नोटिस में सीधे “क्रॉस वोटिंग” का आरोप लगाया गया है
इस बदलाव से साफ है कि कांग्रेस अब इसे तकनीकी गलती नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया कदम मान रही है।
जरनैल सिंह पर क्यों रहा सस्पेंस?
रतिया विधायक जरनैल सिंह को लेकर पार्टी में काफी देर तक सस्पेंस बना रहा। सूत्रों के मुताबिक वे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी माने जाते हैं, जिसके चलते शुरुआत में उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर नरमी दिखाई गई।
हालांकि, पार्टी के भीतर बढ़ते दबाव और असंतोष के बाद देर रात फैसला लिया गया और उन्हें भी नोटिस जारी कर दिया गया।
बाड़ाबंदी के बावजूद संपर्क के आरोप
राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने 31 विधायकों को तीन दिनों तक हिमाचल प्रदेश में बाड़ाबंदी में रखा था, ताकि किसी तरह की टूट-फूट से बचा जा सके।
इसके बावजूद आरोप सामने आए कि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल ने कुछ विधायकों से संपर्क साध लिया था। इससे पार्टी की रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं।
विधायकों की राजनीतिक पृष्ठभूमि
नोटिस पाने वाले विधायकों का अलग-अलग गुटों से जुड़ाव इस मामले को और संवेदनशील बनाता है।
- रेनू बाला और शैली चौधरी को कुमारी सैलजा का करीबी माना जाता है
- मोहम्मद इलियास लंबे समय से सक्रिय नेता हैं और 5 बार विधायक रह चुके हैं
- मोहम्मद इजराइल दूसरी बार विधायक बने हैं और राजनीतिक परिवार से आते हैं
- जरनैल सिंह तीसरी बार विधायक हैं और उनकी गिनती हुड्डा गुट में होती है
क्या हैं राजनीतिक मायने?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मामला सिर्फ अनुशासनहीनता तक सीमित नहीं है, बल्कि कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और असंतोष को भी उजागर करता है।
यदि पार्टी सख्त कार्रवाई करती है, तो इससे संगठनात्मक अनुशासन मजबूत होगा, लेकिन साथ ही अंदरूनी खींचतान और बढ़ सकती है।
अब सबकी नजरें विधायकों के जवाब और कांग्रेस नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि पार्टी इस संकट से कैसे निपटती है।