Greenfield 6 Lane Expressway:उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, चित्रकूट और वाराणसी को जोड़ने वाले 249 किलोमीटर लंबे हाई-स्पीड ग्रीनफील्ड हाईवे की डिजाइन को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने मंजूर कर दिया है। इस मंजूरी के बाद अब परियोजना के लिए डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने का कार्य शुरू किया जाएगा।
यह हाईवे छह लेन का एक्सेस-नियंत्रित कॉरिडोर होगा, जो बुंदेलखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास को नई दिशा देगा। प्रस्तावित मार्ग चित्रकूट, प्रयागराज और वाराणसी के बीच सीधी और तेज़ यातायात सुविधा प्रदान करेगा, जिससे इन प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।
योजना का विस्तार और महत्व
परियोजना की लंबाई लगभग 249 किलोमीटर है और यह छह लेन के एक्सेस नियंत्रित हाईवे के रूप में विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग के दबाव को कम करना और यात्रियों के लिए बेहतर, सुरक्षित व तेज़ सफर सुनिश्चित करना है। ट्रैफिक और माल परिवहन दोनों के लिए इस मार्ग से जुड़ना यात्रा के समय को काफी घटाएगा और लॉजिस्टिक लागत में भी कमी लाएगा।
परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹15,000 करोड़ बताई जा रही है। डिज़ाइन मंजूर हो जाने के बाद इसकी डीपीआर तैयार की जाएगी और परियोजना के अगले चरणों जैसे सर्वे और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए भोपाल स्थित AICONS Engineers Pvt. Ltd. को सर्वे कार्य सौंपा गया है और अनुमान है कि इसमें कुछ महीनों में कार्य शुरू हो जाएगा।
विकास को मिलेगा मजबूती
यह हाईवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि बुंदेलखंड और पूर्वी यूपी के आर्थिक व सामाजिक विकास के लिए भी अहम कदम माना जा रहा है। इससे कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी, औद्योगिक क्षेत्रों का विकास संभव होगा और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। चित्रकूट, प्रयागराज और वाराणसी जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों को जोड़कर यह मार्ग तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए भी सहूलियत लेकर आएगा।
इसके अलावा, नए हाई-स्पीड कॉरिडोर के बनने से स्थानीय व्यवसायों को लाभ होगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र में निवेश आकर्षित होगा। सड़क नेटवर्क के विस्तार से राज्य की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी, जो स्थानीय और बाहरी दोनों स्तरों पर आर्थिक गतिविधियों को तेज करेगी।
आगे की प्रक्रियाएँ
डिज़ाइन मंजूरी मिल जाने के बाद डीपीआर को अंतिम रूप देने और सर्वे कार्य के पूर्ण होने के बाद ही परियोजना का वास्तविक निर्माण कार्य शुरू होगा। एनएचएआइ और संबंधित विभाग द्वारा समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि जनता को जल्द से जल्द इस सुविधा का लाभ मिल सके।
यह परियोजना उत्तर भारत में सड़क संपर्क को और अधिक प्रभावी बनाते हुए क्षेत्रीय विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश के रूप में देखी जा रही है।
