Aaj Ki Kahani: हंस और कछुआ – एक छोटी गलती की बड़ी सजा
प्राचीन समय की बात है। एक घने जंगल के किनारे एक सुंदर तालाब था। उसी तालाब में एक कछुआ रहता था और उसके पास ही दो हंस भी रहते थे। धीरे-धीरे तीनों में गहरी मित्रता हो गई। वे रोज़ साथ बैठते, बातें करते और अपना समय खुशी से बिताते थे।
समय बीतता गया और उनकी दोस्ती और भी मजबूत होती चली गई।
एक वर्ष उस क्षेत्र में भयंकर सूखा पड़ गया। तालाब का पानी दिन-प्रतिदिन कम होने लगा। हंसों को चिंता होने लगी कि अगर पानी पूरी तरह सूख गया तो उनके मित्र कछुए का जीवन खतरे में पड़ जाएगा, क्योंकि कछुआ पानी के बिना ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह सकता था।
एक दिन दोनों हंसों ने कछुए से कहा,
“मित्र, हमने पास के जंगल में एक बड़ा और गहरा तालाब देखा है। वहाँ बहुत पानी है। अगर तुम वहाँ पहुँच जाओ तो तुम्हारा जीवन सुरक्षित रहेगा।”
कछुआ यह सुनकर खुश तो हुआ, लेकिन उसने चिंता से पूछा,
“पर मैं वहाँ तक कैसे पहुँचूँगा? मैं तो उड़ नहीं सकता।”
हंसों ने कुछ देर सोचा और फिर एक उपाय निकाला। उन्होंने एक मजबूत लकड़ी की डंडी लाकर कछुए से कहा,
“तुम इस डंडी को अपने मुँह से मजबूती से पकड़ लेना। हम दोनों इसे अपने-अपने सिरों से चोंच में पकड़कर उड़ेंगे और तुम्हें उस तालाब तक पहुँचा देंगे। लेकिन एक बात का ध्यान रखना — उड़ते समय तुम बिल्कुल भी मुँह मत खोलना।”
कछुए ने उनकी बात मान ली।
दोनों हंस डंडी को पकड़कर आकाश में उड़ने लगे और कछुआ बीच में लटक गया। जब वे उड़ते हुए एक गाँव के ऊपर से गुजर रहे थे, तब नीचे खड़े लोगों ने यह अजीब दृश्य देखा। लोग आश्चर्य से चिल्लाने लगे, हँसने लगे और तरह-तरह की बातें करने लगे।
लोगों की बातें सुनकर कछुए को गुस्सा आ गया। वह खुद को रोक नहीं पाया और जवाब देने के लिए जैसे ही उसने मुँह खोला, डंडी उसके मुँह से छूट गई।
अगले ही पल वह ऊँचाई से नीचे गिर पड़ा।
हंसों ने दुखी होकर कहा,
“काश! हमारा मित्र थोड़ा धैर्य और संयम रखता, तो आज वह सुरक्षित नए तालाब तक पहुँच जाता।”
शिक्षा
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि छोटी-सी असावधानी या क्रोध कभी-कभी बड़ी मुसीबत बन सकता है।
बुद्धिमान वही होता है जो कठिन समय में भी धैर्य और संयम बनाए रखे और अच्छे मित्रों की सलाह को ध्यान से माने।