CBSE 2026 Rules: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शिक्षा व्यवस्था को अधिक डिजिटल, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत बोर्ड ने दो अहम नियम लागू करने का निर्णय लिया है। इसके अनुसार अब बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकरण बिना APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) ID के स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की बोर्ड परीक्षाएं दो स्तरों पर आयोजित की जाएंगी।
बोर्ड का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को छात्र-केंद्रित, डिजिटल और अधिक सुव्यवस्थित बनाना है।
क्या है APAAR ID?
APAAR ID को छात्रों की शैक्षणिक यात्रा का डिजिटल पहचान पत्र माना जा रहा है। इसके माध्यम से हर छात्र का पूरा अकादमिक रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहेगा। यह ID एक स्थायी अकाउंट की तरह कार्य करेगी, जिसमें छात्र की कक्षा, विषय, परिणाम और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियां दर्ज होंगी।
CBSE ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 9वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों को बोर्ड परीक्षा पंजीकरण और कैंडिडेट्स की सूची (LOC) भरते समय APAAR ID देना अनिवार्य होगा। जिन छात्रों के पास APAAR ID नहीं होगी, उनका पंजीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
50% छात्रों के पास अभी भी नहीं है APAAR ID
ताजा समीक्षा के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2025-26 तक करीब 50% छात्रों के पास भी APAAR ID उपलब्ध नहीं थी। इसे देखते हुए बोर्ड ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों के पंजीकरण में तेजी लाएं और अधिक से अधिक छात्रों की APAAR ID बनवाने में सहयोग करें।
राज्यों की स्थिति: कहां कितनी तैयारी?
CBSE द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न राज्यों में APAAR ID पंजीकरण की स्थिति अलग-अलग है।
- पश्चिम बंगाल: कक्षा 9 के 10% और कक्षा 11 के 18% छात्रों के पास APAAR ID नहीं है।
- हरियाणा: यहां स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। कक्षा 9 और 11 के लगभग 54% छात्रों की ID पंजीकृत है।
- गुजरात: कक्षा 9 के 27.59% और कक्षा 11 के 19.94% छात्रों ने ID बनवाई है।
- बिहार: कक्षा 9 के 23.59% और कक्षा 11 के 26.01% छात्रों के पास APAAR ID है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई राज्यों में अभी भी पंजीकरण की गति धीमी है। CBSE ने कहा है कि जिन राज्यों को तकनीकी या प्रशासनिक दिक्कतें आ रही हैं, वहां विशेष सहयोग प्रदान किया जाएगा।
दो स्तरों पर होंगी बोर्ड परीक्षाएं
APAAR ID के अलावा CBSE ने यह भी फैसला किया है कि गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की बोर्ड परीक्षाएं दो स्तरों पर कराई जाएंगी। इसका उद्देश्य छात्रों को उनकी क्षमता और रुचि के अनुसार विकल्प देना है। इससे विद्यार्थियों पर अनावश्यक दबाव कम होगा और वे अपनी तैयारी के स्तर के अनुसार परीक्षा दे सकेंगे।
क्या होगा छात्रों और स्कूलों पर असर?
इन नए नियमों से छात्रों को एक स्थायी डिजिटल पहचान मिलेगी, जिससे भविष्य में कॉलेज प्रवेश, स्कॉलरशिप और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाएं आसान होंगी। वहीं स्कूलों को भी रिकॉर्ड प्रबंधन में सुविधा मिलेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
हालांकि, जिन छात्रों के पास अभी APAAR ID नहीं है, उन्हें जल्द से जल्द पंजीकरण कराना होगा। स्कूलों को भी बोर्ड के निर्देशानुसार डेटा अपडेट करने और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा गया है।
CBSE का यह फैसला शिक्षा प्रणाली को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। 2026-27 से लागू होने वाले इन नियमों से छात्रों को एकीकृत डिजिटल अकादमिक पहचान मिलेगी और परीक्षा प्रणाली अधिक संगठित होगी।
अब छात्रों और स्कूलों के लिए जरूरी है कि वे समय रहते APAAR ID बनवाएं, ताकि भविष्य में बोर्ड परीक्षा पंजीकरण में कोई बाधा न आए।
