Green Highway Project: देश में पहली बार ‘बी कॉरिडोर’ मिशन, हाईवे किनारे लगेंगे लाखों देशी पेड़, NHAI का मास्टर प्लान!

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Green Highway Project: अब देश के नेशनल हाईवे सिर्फ गाड़ियों की तेज रफ्तार के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की नई पहल के लिए भी पहचाने जाएंगे। National Highways Authority of India (NHAI) ने पहली बार ‘बी कॉरिडोर’ विकसित करने का फैसला किया है। इस योजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ऐसे पेड़-पौधे लगाए जाएंगे, जो मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले जीवों के लिए अनुकूल हों। इस कदम से प्राकृतिक संतुलन को मजबूती मिलने और जैव विविधता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।


सजावटी पौधों की जगह अब परागण मित्र पौधे

अब तक हाईवे के किनारे अधिकतर सजावटी पौधे लगाए जाते थे, जिनका उद्देश्य सौंदर्य बढ़ाना होता था। लेकिन ‘बी कॉरिडोर’ योजना के तहत ऐसे पेड़-पौधों का चयन किया जाएगा, जिनमें अलग-अलग मौसम में फूल खिलें।

इससे मधुमक्खियों को सालभर रस और पराग उपलब्ध रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मधुमक्खियां खेती और बागवानी के लिए बेहद अहम हैं, क्योंकि वे फसलों के परागण में बड़ी भूमिका निभाती हैं। यदि उनकी संख्या और सेहत बेहतर होगी, तो फलों, सब्जियों और अन्य फसलों की पैदावार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

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कौन-कौन से पेड़ लगाए जाएंगे?

इस योजना के तहत नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस जैसे देशी और पराग-समृद्ध पेड़ लगाए जाएंगे। इनके साथ झाड़ियां, जड़ी-बूटियां और घास भी उगाई जाएंगी ताकि एक प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र विकसित हो सके।

खास बात यह है कि सूखी लकड़ी और खोखले पेड़ों के तनों को पूरी तरह हटाया नहीं जाएगा। इन्हें मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले जीवों के लिए प्राकृतिक आवास के रूप में संरक्षित रखा जाएगा। पेड़ों और पौधों का चयन इस तरह किया जाएगा कि हर मौसम में कुछ न कुछ फूल खिलते रहें और सालभर हरियाली बनी रहे।

‘बी कॉरिडोर’ योजना के तहत देशी और पराग-समृद्ध पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें शामिल हैं:

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  • 🌿 नीम
  • 🌿 करंज
  • 🌿 महुआ
  • 🌿 पलाश
  • 🌿 बॉटल ब्रश
  • 🌿 जामुन
  • 🌿 सिरिस

इसके अलावा:

  • 🌱 विभिन्न झाड़ियां
  • 🌾 घास
  • 🌼 जड़ी-बूटियां

हर 500 मीटर से 1 किलोमीटर पर हरित क्लस्टर

NHAI के फील्ड ऑफिस देशभर में ऐसे हाईवे सेक्शन चिन्हित करेंगे, जहां लगभग 500 मीटर से 1 किलोमीटर के अंतराल पर फूलदार पेड़ों के समूह विकसित किए जा सकें। यह दूरी मधुमक्खियों की औसत भोजन खोजने की सीमा को ध्यान में रखकर तय की गई है, ताकि उन्हें लगातार भोजन स्रोत मिलता रहे।

वित्त वर्ष 2026-27 में NHAI करीब 40 लाख पेड़ लगाने की योजना बना रहा है, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत ‘बी कॉरिडोर’ परियोजना के तहत होंगे। प्रत्येक फील्ड ऑफिस को कम से कम तीन ऐसे कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य दिया गया है।

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पर्यावरण और कृषि को मिलेगा बड़ा लाभ

विशेषज्ञों का कहना है कि इस पहल से जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा। मधुमक्खियों को बेहतर वातावरण मिलने से फसलों में परागण की प्रक्रिया सुधरेगी, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि संभव है।

यह पहल दर्शाती है कि अब बुनियादी ढांचा विकास केवल सड़कों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास को भी समान महत्व दिया जा रहा है। आने वाले वर्षों में ‘बी कॉरिडोर’ देश के हाईवे को हरित और पर्यावरण मित्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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