MDU Rohtak: रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) में प्रशासनिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। हाल ही में कुलपति प्रो. राजबीर सिंह द्वारा कुलसचिव (रजिस्ट्रार) डॉ. कृष्ण कांत को निलंबित करने के बाद मामला और तूल पकड़ गया था। अब इस घटनाक्रम में बड़ा मोड़ तब आया जब हरियाणा के राज्यपाल ने हस्तक्षेप करते हुए निलंबन आदेश को रद्द कर दिया और उन्हें तत्काल प्रभाव से बहाल करने के निर्देश जारी कर दिए।
राज्यपाल कार्यालय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि 17 फरवरी 2026 को जारी निलंबन आदेश निरस्त माना जाएगा और डॉ. कृष्ण कांत को तुरंत कार्यभार संभालने दिया जाए। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि भविष्य में कुलपति किसी भी प्रकार की कार्रवाई राज्यपाल की पूर्व अनुमति के बिना नहीं कर सकेंगे।
24 घंटे में बदला घटनाक्रम
विश्वविद्यालय में यह घटनाक्रम बेहद तेजी से बदला। जानकारी के अनुसार 17 फरवरी 2026 को कुलपति ने रजिस्ट्रार डॉ. कृष्ण कांत को निलंबित कर दिया था। उनके साथ एक प्रोफेसर को भी हटाया गया था और इस संबंध में आधिकारिक पत्र भी जारी किया गया था।
हालांकि अगले ही दिन 18 फरवरी को राज्यपाल ने हस्तक्षेप करते हुए निलंबन को रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में हलचल तेज हो गई और पूरे मामले ने राजनीतिक व शैक्षणिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
कार्यकारी परिषद की बैठक बना विवाद की जड़
पूरा विवाद कार्यकारी परिषद (EC) की बैठक को लेकर शुरू हुआ। 18 फरवरी को यह बैठक बुलाई गई थी, जिसमें विभिन्न पदों पर भर्ती और पदोन्नति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित थी।
बताया जा रहा है कि कुलपति का कार्यकाल 20 फरवरी 2026 को समाप्त होने वाला था, इसलिए वे इस बैठक में कुछ महत्वपूर्ण फैसले लेना चाहते थे। लेकिन उच्च शिक्षा विभाग और राज्यपाल कार्यालय ने इस बैठक को गैर कानूनी बताते हुए इसे रोकने के निर्देश जारी कर दिए।

रजिस्ट्रार ने माने थे सरकार के निर्देश
सूत्रों के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश मिलने के बाद रजिस्ट्रार डॉ. कृष्ण कांत ने अधिकारियों को बैठक में शामिल न होने के निर्देश दिए थे। इसी बात को लेकर विवाद और बढ़ गया।
कुलपति ने इसे आदेशों की अवहेलना मानते हुए रजिस्ट्रार को निलंबित कर दिया था। हालांकि बाद में राज्यपाल ने हस्तक्षेप कर रजिस्ट्रार के पक्ष में फैसला सुनाया और निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया।
प्रशासनिक टकराव से बढ़ी चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय में प्रशासनिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज है। राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में इसे विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार के बीच टकराव के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में इस तरह के विवाद का असर शैक्षणिक गतिविधियों और प्रशासनिक कार्यों पर भी पड़ सकता है।
अब सभी की नजर आगे होने वाले प्रशासनिक फैसलों पर टिकी है। कुलपति का कार्यकाल समाप्ति के करीब होने और सरकार के हस्तक्षेप के बाद आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय प्रशासन में नए निर्णय सामने आ सकते हैं।
फिलहाल इतना तय है कि MDU रोहतक का यह विवाद अब केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारों को लेकर भी चर्चा का विषय बन चुका है।
